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Sikkim Accident: शहादत तक साथ चला भूपेंद्र की मातृभूमि का तिरंगा, फौज में थे परिवार की तीसरी पीढ़ी के सदस्य

Sun, 25 Dec 2022 07:32 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
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शहीद भूपेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
सिक्किम में शुक्रवार को हुए सड़क हादसे में एटा का एक जवान भी शहीद हो गया है।  लांस नायक के शहीद होने की खबर शुक्रवार शाम को जैसे ही परिजनों को मिली तो परिवार में चीत्कार मच गई। गांव सहित आसपास के लोग शहीद के घर पहुंचना शुरू हो गए। गांव के लोगों ने बताया कि सिक्किम में हुए हादसे में शहीद लांसनायक का पूरा परिवार आर्मी में रहा है।

बाबा और पिता को देख गए थे आर्मी में

शहीद भूपेंद्र सिंह बाबा और पिता को देख आर्मी में गए थे, लेकिन अनहोनी की किसी को जानकारी नहीं थी। शुक्रवार को मोबाइल पर इस हादसे का मैसेज आया। इसके बाद से परिजनों का रो- रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने बताया पूरा परिवार देश की सेवा करता रहा है। 

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सिक्किम में सेना का वाहन हादसे का शिकार। - फोटो : Amar Ujala
अलीगंज ब्लॉक क्षेत्र के गांव ताजपुर अद्दा निवासी भूपेंद्र की शुक्रवार को सिक्किम में हुए हादसे में शहीद हो गए। परिजनों ने बताया पूरा परिवार देश की सेवा करता रहा है। बाबा बैजनाथ व पिता सुरेंद्र सिंह राठौर को देखकर ही भूपेंद्र ने देश सेवा करने का निर्णय लिया था। रोते- रोते भूपेंद्र के बाबा ने बताया कि वह जब छुट्टी पर आते थे तो भूपेंद्र उनसे कई जानकारी लेता था। इस दौरान वह बचपन से ही देश की सेवा करने की बात कहता था। 
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शहीद भूपेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि उनके साथ दौड़ लगाने भी जाता था। तैयारियों को लेकर भी बचपन में पूछता था। भूपेंद्र के पिता भी आर्मी में थे, तो वह उनसे भी जानकारी लेता था। वहीं परिवार के अपने साथ के लड़कों से भी देश की सेवा करने के लिए कहता रहता था। 
 

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शहीद के परिवारीजन - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2014 में भूपेंद्र के पिता सेवा निवृत्त हो चुके हैं। उसी वर्ष भूपेंद्र आर्मी में लग गया था। सात दिसबंर को छुट्टी खत्म करके वापस गया था। शुक्रवार की दोहपर पिता के मोबाइल पर मैसेज आया कि दुघर्टना हो गई है। इसके बाद उसकी चिंता सताने लगी थी। बाद में अनहोनी की जानकारी मिली। 
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शहीद के गांव पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी - फोटो : अमर उजाला

दो भाइयों में थे बड़े

परिजनों ने बताया भूपेंद्र दो भाइयों में बड़े थे। उनके छोटे भाई की बचपन में उंगली कट गई थी। इससे वह सेना में नहीं जा पाया। वह गांव में ही खेती को देखता था। भूपेंद्र के कोई बहन नहीं है। उसके चचेरे भाई आर्मी में ही तैनात हैं और देश सेवा कर रहे हैं। 
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