ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी के अलावा शहर में कई और ऐसे स्मारक हैं जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हो सकते हैं। लेकिन, प्रचार-प्रसार के अभाव में ये उपेक्षित हैं। न तो यहां पर्यटक पहुंच रहे हैं और न ही शहरवासी। कई स्मारक तो बदहाली का भी शिकार हो गए हैं, अवैध निर्माणों से घिर गए हैं। इनमें से कुछ तो ऐसे भी स्मारक हैं जहां पहुंचने तक का आसान रास्ता नहीं है।
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चीनी का रोजा एत्मादउद्दौला
- फोटो : अमर उजाला
चीनी का रोजा: यमुनापार स्थित यह इमारत चीनी टाइल्स जड़ी विश्व में अपने किस्म की एक ही है। वस्तुत: इसमें शाहजहां का वजीर अफजल खां (शुक्रुल्लाह खान शिराजी) सपत्नीक दफन है। वजीर का इंतकाल सन् 1638 ई. में लाहौर के पास हुआ था। इस इमारत पर जड़ी नीले रंग की टाइल्स कभी बहुत दूर से चमका करती थीं।
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लाल ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
लाल ताजमहल: यह कर्नल जॉन विलियम हैसिंग का मकबरा है। भगवान टाकीज चौराहे के पास स्थित ताजमहल की तर्ज पर रोमन कैथोलिक कब्रिस्तान के बीचोंबीच बना ये स्मारक सन् 1803 में बना। वह 1784 में मराठा सरकार महादजी सिंधिया की सेना में उच्च पद पर था। महादजी की मृत्यु के बाद वह आगरा आ गया था। इस स्मारक में भी ताजमहल की तरह से भूमिगत कक्ष हैं। ताज की मीनारों की तरह से ही इसके चारों ओर भी मीनारें हैं।
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सादिक खां-सलावत खां की बारहदरी
- फोटो : अमर उजाला
सादिक खां-सलावत खां की बारहदरी: यह बारहदरी आगरा-मथुरा मार्ग पर गैलाना मोड़ पर है। शाहजहां के खास सिपहसालार सलावत खां की स्मृति में निर्मित बताया जाता है। इसके पास ही 64 खंभा स्मारक हैं, इसलिए इसे चौंसठ खंभा इमारत भी कहते हैं। अकबर टॉम्ब से पहले यह स्मारक पर्यटकों के लिए देखने योग्य है।
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दीवारों का नहीं हो पाया संरक्षण (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
सवाल: ताज, किला और सीकरी को छोड़कर अन्य स्मारक बदहाल हो रहे हैं? जवाब: समय-समय पर इनके संरक्षण का कार्य कराया जाता है। वर्तमान में भी सलावत खां सहित कुछ अन्य स्मारकों पर काम चल रहा है। सवाल: सलावत खां का मकबरा, चीना का रोजा जैसे कुछ स्मारक तक पहुंचने का मार्ग तक ठीक नहीं है? जवाब: लोगों ने स्मारकों के प्रतिबंधित दायरे में निर्माण कर लिए हैं। इनके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। एएसआई के
पास अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण के अधिकार नहीं हैं। (वसंत कुमार स्वर्णकार, अधीक्षण पुरातत्वविद से बातचीत)
रमेश वाधवा, अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर्स एसोसिएशन का कहना है कि हाल ही में हमने केंद्रीय पर्यटन मंत्री के समक्ष आगरा को प्रमोट करने के लिए किसी निजी विज्ञापन कंपनी को जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा है। ताकि देश-दुनिया के सैलानी जान सकें कि आगरा में ताजमहल, आगरा किले, फतेहपुर सीकरी के अलावा भी कई और स्मारक देखने योग्य हैं। शमशुद्दीन, अध्यक्ष, आगरा एप्रूव्ड टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन का कहना है कि आगरा इतिहास के साक्ष्यों से भरा है। यहां पर्यटकों को आकर्षित करने वाले कई और स्मारक हैं। कई ऐसे भी स्मारक हैं जिनके बारे में पर्यटक जानना और देखना चाहते हैं। लेकिन, प्रचार-प्रसार के अभाव में ये गुमनामी में हैं। यदि इनका प्रचार किया जाए तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।