सिपाही की हत्या और दरोगा पर हमले के मुख्य आरोपी मोती को तो पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया लेकिन उसके दोनों भाई फरार हैं। इनका पुलिस को कहीं कोई सुराग नहीं लग रहा। 20 दिन गुजर गए, 8 टीमें दिन रात कोशिशों में जुटी हैं, लेकिन नतीजा अभी भी खाली हाथ है।
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कासगंज कांड: मुठभेड़ में मारा गया मोती सिंह
- फोटो : अमर उजाला
9 फरवरी को वांछितों की तलाश में गए दरोगा अशोक एवं सिपाही देवेंद्र पर माफिया मोती ने अपने भाइयों और साथियों के साथ मिलकर हमला बोल दिया। इसमें सिपाही की जान गई और दरोगा अभी भी घायल है। पुलिस इस घटना के मुख्य आरोपी माफिया मोती और उसके भाई एलकार को मुठभेड़ में ढेर कर चुकी है जबकि मां सहित चार आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
कासगंज कांड: मुठभेड़ के बाद घटनास्थल पर जाते पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
माफिया मोती का भाई मोहर सिंह एवं मानपाल फरार है। 20 दिन पूरे हो गए। 8 टीमें दिन रात सुरागकसी में लगी हैं लेकिन अभी तक पुलिस को सफलता हाथ नहीं लग रही। गंगा और कालीनदी की खादर पूरी तरह पुलिस ने छान ली है, लेकिन यहां माफिया के भाई नहीं मिल रहे। समीपवर्ती जिलों में भी तलाश अभियान चल रहा है। आस पास के जिलों की पुलिस भी सहयोग में जुटी है। तब भी कासगंज पुलिस सफलता से दूर है। दावा किया जा रहा है कि गिरफ्तारी होने तक इसी तरह ऑपरेशन चलता रहेगा।
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कासगंज के एसपी मनोज सोनकर, कच्ची शराब की भट्ठी (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
फरार चल रहे मानपाल और मोहर सिंह की तलाश में सभी 8 टीमें जुटी हुई हैं। गंगा और कालीनदी की खादर में लगातार कांबिंग की जा चुकी है। पड़ोसी जिलों में भी तलाश की जा रही है। दोनों आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। - मनोज सोनकर, एसपी।
कासगंज हत्याकांड: यहीं पर हुई थी पुलिसकर्मियों से बर्बरता
- फोटो : अमर उजाला
कासगंज जिले में पुलिस ने सिपाही की हत्या के मुख्य आरोपी शराब माफिया मोती सिंह का खात्मा कर दिया है। इसके साथ ही उसका कच्ची शराब का धंधा भी बंद हो गया, लेकिन गंगा और काली नदी के खादर इलाके में धधकती कच्ची शराब की भट्ठियां कब बुझेंगी? यह सवाल अभी भी बना हुआ है। नशे के इस कारोबार को जड़ से खत्म करना पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं है। जिले में गंगा और काली नदी की खादर में 50 से अधिक ऐसे गांव हैं, जहां कच्ची शराब की भट्ठियां धधकती हैं। यहां तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं है।