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यूपी में तीन बच्चों और पत्नी का कत्ल: 'हमारे गांव में ऐसो पहले कभी न भओ', शवों के पीछे दौड़ परिजन और ग्रामीण

Mon, 23 Feb 2026 10:20 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कासगंज

सार

कासगंज के नगला भोजराज में सत्यवीर और उसके परिवार के सदस्यों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया। बच्चों के शवों को दफनाने के बाद सत्यवीर एवं उसकी पत्नी रामश्री के शवों का वहीं पर दाह संस्कार किया गया।
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Kasganj murder and suicide - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
कासगंज के अमांपुर में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। मृतकों को अंतिम संस्कार तक अपनों का कंधा नहीं मिल सका और उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली से खेत पर ले जाकर विदाई दी गई। रविवार सुबह करीब 7:30 बजे पोस्टमार्टम के बाद पांचों शव गांव पहुंचे। गांव में छाई गहरी चुप्पी और परिजन की आंखों में आंसू थे। परिस्थितियां ऐसी रहीं कि मृतकों को अंतिम संस्कार में अपनों का कंधा भी नहीं मिल सका। 

परिजन ने शवों को गांव के समीप आम के बाग में रखवाया और बाद में ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर खेत तक ले जाया गया। एक साथ पांच लोगों की मौत ने गांव के लोगों को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक घटना ने न केवल परिवार को उजाड़ दिया बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक और संवेदनाओं की लहर फैला दी। ग्रामीण और परिजन इस हृदयविदारक क्षण को याद कर आंसू नहीं रोक पा रहे हैं।
 
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पांच मौतों से गमगीन परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बता दें कि अमांपुर के एटा रोड स्थित मकान से शनिवार शाम पुलिस ने सत्यवीर, उसकी पत्नी रामश्री, बेटियां प्राची और आकांक्षा (अमरवती) तथा बेटा गिरीश के शव बरामद किए। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस ने सभी शव कब्जे में लेकर देर रात एंबुलेंस से पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए थे।
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ट्रैक्टर ट्रॉली में शव रखते परिजन व अन्य - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सत्यवीर के हिस्से के खेत पर किया अंतिम संस्कार
कासगंज के नगला भोजराज में रविवार को सत्यवीर व उसके परिवार के सदस्यों के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए उसके पिता नेम सिंह और ससुर बलवीर सिंह सहित अन्य परिजन के बीच शव के दाह संस्कार की बात नदी किनारे होने लगी। 

 

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परिवार की मौत के बाद विलाप करते परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद उनके ससुर ने खेत पर बच्चों व बेटी और दामाद का अंतिम संस्कार की बात कही। इसके बाद शवों को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर खेत पर ले जाया गया। जेसीबी ने दूसरे भाई के खेत के पास बच्चों को दफनाने के लिए गड्ढा खोदा। 
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परिवार की मौत के बाद विलाप करते परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस पर ससुर व अन्य लोगों ने मना किया और बाद में सत्यवीर के हिस्से वाले खेत पर गड्ढा खोदकर बच्चों के शव को दफनाने के बाद सत्यवीर व उसकी पत्नी रामश्री के शवों का वहीं पर दाह संस्कार किया गया। 
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शवों के पीछे दौड़ते हुए परिजन व ग्रामीण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शवों के पीछे दौड़ परिजन व ग्रामीण
कासगंज के नगला भोजराज निवासी सत्यवीर व उसकी पत्नी रामश्री, बेटी प्राची, अमरवती और बेटा गिरीश का शव आम के बाग में रविवार की सुबह पहुंचा। शव पहुंचने के बाद मौके पर परिजन व आस-पास के लोग पहुंच गए। देखते ही देखते काफी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। 

 
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शवों के पीछे दौड़ते हुए परिजन व ग्रामीण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुबह 9:45 बजे बाग से ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर दाह संस्कार के लिए ले जा रहे थे। मृतक सत्यवीर की मां कौशल्या व उनकी सास उर्मिला देवी, साली लक्ष्मी देवी, शीला,कृष्णा, ममता सहित अन्य परिजन व ग्रामीण रोते बिलखते शवों के पीछे दौड़ पड़े। 

 

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पांच मौतों से गमगीन परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हमारे गांव में ऐसो पहले कभी न भओ
कासगंज के नगला भोजराज में पांच शव पहुंचने के बाद महिलाएं व पुरुष आम के बाग की ओर दौड़ पड़े। शवों को देखने के बाद लोगों की आंखे नम थी। मौके से लौट रहीं नगला गुलरिया की रहने वाली सत्यवती और तारावती ने बताया कि लला आजतक हमारे गांव में ऐसो कभी न भओ। शवों को देखकर उनकी आंखों में आंसू निकल रहे थे। वह कह रहीं थी कि भगवान ऐसा किसी के साथ न करे।
 
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दंपती का किया अंतिम संस्कार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सत्यवीर के अवसाद में जाने के 5 प्रमुख कारण आए सामने
  • सत्यवीर का बेटा गिरीश न्यूरो समस्या से गंभीर बीमार था। 15 से 20 हजार रुपये महीने का खर्च इलाज में आ रहा था। बेटे का इलाज आगरा में चल रहा था।
  • सत्यवीर आर्थिक तंगी के कारण अमांपुर कस्बे के पिता के नाम के मकान में भी हिस्सेदारी की मांग कर रहा था। इस मकान में उसका भाई देशराज रहता है।
  • उधार रुपये चुकाने का भी दबाव बना हुआ था। सत्यवीर ने कुछ लोगों से अलग अलग उधार रुपये ले रखे थे। उधार देने वाले लोग लगातार रुपये मांग रहे थे।
  • सत्यवीर के नाम एक बोलेरो कार थी। किराए पर चलती थी। पिता इसका संचालन कराते थे। बोलेरो की दुर्घटना होने पर मुआवजे की राशि सत्यवीर को मिली जिसमें कुछ रुपये उसने अपने पास रख लिए। यह रुपये रखने के लिए परिवार के लोगों से कहासुनी भी होती थी।
  • सत्यवीर के हिस्से की जमीन पर परिवार के लोग कब्जा जमाए थे और उसके खेती करने में अड़चनें पैदा कर रहे थे। लोगों के बीच इस तरह की चर्चाएं काफी थीं।
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