कासगंज जिले में सिपाही की हत्या के मुख्य आरोपी शराब माफिया मोती को दबोचना आसान नहीं रहा। 12 दिन के बाद पुलिस भले ही मोती को मुठभेड़ में मारने में कामयाब हुई, लेकिन खादर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ मोती ने पुलिस को कई बार मात दी। उसकी तलाश में कासगंज पुलिस की आठ टीमें लगी हुईं थीं। इनमें 34 पुलिसकर्मी शामिल रहे। बरेली और आगरा की एसटीएफ की टीमें गुप्त रूप से अभियान में शामिल थीं। इसके अलावा एडीजी जोन के स्तर से लगाई गईं पुलिस टीमें भी सक्रिय थीं। तब जाकर सफलता मिली।
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कासगंज हत्याकांड: मुख्य आरोपी मोती का ममेरा भाई और मौसा
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस टीमें लगातार कासगंज, एटा, बदायूं और फर्रुखाबाद जिले के गंगा और कालीनदी के खादर में चप्पे-चप्पे पर नजर बनाए हुई थीं। मोती तक पहुंचने में पुलिस को चार दिन पहले भी एक मौका मिला था, जब मुठभेड़ में मोती भागने में सफल हो गया, लेकिन पुलिस ने उसके एक ममेरे भाई को गिरफ्तार कर लिया। ममेरे भाई से पूछताछ के आधार पर शरण देने वाले मौसा को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
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कासगंज हत्याकांड: यहीं पर हुई थी पुलिसकर्मियों से बर्बरता
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मोती के भाग जाने का मलाल पुलिस को था, लेकिन इलाके में मुखबिरों का तंत्र और सक्रिय कर दिया गया। गांव के चौकीदार, खुफिया पुलिस व सादी वर्दी में पुलिसकर्मी पूरी तरह से सक्रिय थे और मोती की गिरफ्तारी के ऑपरेशन में दिनरात जुटे हुए थे। चूंकि हिस्ट्रीशीटर मोती का ज्यादातर समय काली नदी और गंगा की खादर में ही बीतता था, इसलिए उसे कटरी के चप्पे-चप्पे की जानकारी थी।
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कासगंज कांड: मुठभेड़ में मारा गया मोती सिंह
- फोटो : अमर उजाला
यही कारण है कि वह कटरी में ही इधर-उधर छिपकर पुलिस को धता बताता रहा। लेकिन वह ज्यादा दिन तक पुलिस से छिप न सका। सिढ़पुरा क्षेत्र में पुलिस ने रविवार तड़के उसे मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस इसके एक भाई एलकार को पहले ही मार चुकी है। उसके दो भाई फरार हैं। पुलिस का कहना है कि पुलिस पर हमले में वे दोनों भी शामिल थे। उनकी तलाश की जा रही है।
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कासगंज एनकाउंटर: मुठभेड़ में मारा गया मुख्य आरोपी मोती
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एएसपी आदित्य वर्मा ने बताया कि मोती की गिरफ्तारी के अभियान में पुलिस की टीमें लगातार जुटी रहीं। मुखबिरों का जाल फैलाया गया। जिले की टीमों के अलावा एसटीएफ बरेली और आगरा की टीमें लगी थीं। वहीं एडीजी जोन की ओर से भी पुलिस टीमों को लगाया गया था। पुलिस की सक्रियता के चलते पुलिस मोती तक पहुंच पाई और मुठभेड़ में गोली लगने से उसकी मौत हो गई।
कासगंज कांड: मुठभेड़ के बाद घटनास्थल पर जाते पुलिस अधिकारी
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तीन थाना प्रभारियों, एसओजी और सर्विलांस प्रभारी के नेतृत्व में अलग-अलग टीमों ने घेराबंदी कर माफिया को मुठभेड़ में मार गिराया। इस ऑपरेशन की कमान पटियाली के सीओ गवेंद्र गौतम ने संभाली। कुछ दिन पहले शासन स्तर से उनका स्थानांतरण हुआ और वे मुख्यालय से संबंद्ध कर दिए गए, लेकिन इस महत्वपूर्ण ऑपरेशन से जुड़े होने के कारण एसपी ने उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया था।पुलिस अधीक्षक मनोज सोनकर सहित अन्य पुलिस अधिकारियों ने सीओ को ऑपरेशन सफल करने की बधाई दी।