जोंस मिल प्रकरण में 75 से अधिक कब्जेदारों ने एडीएम प्रोटोकाल कार्यालय में प्रत्यावेदन जमा कर दिए हैं। एक सप्ताह में जांच कर टीम अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को देगी। शनिवार को अंतिम दिन 30 से अधिक बैनामे, साक्ष्य व शपथपत्र प्रस्तुत किए गए। प्रभावित लोगों का कहना था कि उन्होंने 12 साल का रिकार्ड व दस्तावेज देखकर जमीन खरीदीं, अब इसमें उनका क्या कसूर है।
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जोन्स मिल
- फोटो : अमर उजाला
भूमि के कब्जेदारों ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए। आरोप लगाया कि छह महीने तक चली जांच में प्रशासन ने कभी उनका पक्ष नहीं सुना। जब मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है फिर प्रशासन कैसे कोई निर्णय ले सकता है। 70 साल बाद प्रशासन को जोंस मिल में भूमाफिया नजर आ रहे हैं। एडीएम प्रोटोकॉल ने कहा कि सभी आवेदन सूचीबद्ध कर लिए हैं। सोमवार से सुनवाई शुरू होगी। एडीएम प्रोटोकॉल व एसीएम सुनवाई करेंगे। फिर अपनी जांच आख्या डीएम के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
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जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह
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अगले सप्ताह टास्क फोर्स बैठक
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह की अध्यक्षता में होने वाली जनपदीय एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स की बैठक शनिवार को स्थगित हो गई। डीएम ने बताया कि टास्क फोर्स की बैठक फरवरी के पहले सप्ताह में आयोजित की जाएगी।
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जोंस मिल के इस हिस्से में हुआ था ब्लास्ट
- फोटो : अमर उजाला
जोंस मिल संघर्ष समिति ने जांच रोकने की मांग की, ज्ञापन दिया
जोंस मिल संघर्ष समिति के करीब 250 सदस्य शनिवार को कलक्ट्रेट पहुंचे। जिलाधिकारी के नहीं मिलने पर एसडीएम सदर पीसी आर्य से मुलाकात करके शपथ पत्र जमा करने के साथ ही ज्ञापन देकर कोर्ट का आदेश आने तक प्रशासन की जांच को रोकने की मांग की।
जोंस मिल संघर्ष समिति के पदाधिकारी प्रेसवार्ता के दौरान
- फोटो : अमर उजाला
संघर्ष समिति के सदस्यों ने कहा कि 2087 नंबर खसरे में नजूल व राजस्व की कोई संपत्ति नहीं है। इसके बावजूद वहां प्रशासन ने पानी, बिजली मरम्मत, नए निर्माण हस्तांतरण व नक्शे पास करने पर रोक लगा दी है। समिति के अधिवक्ता बृजेंद्र रावत, हरीश बत्रा, कृष्ण कुमार रावत, एडवोकेट चाहर, विवेक शर्मा ने कहा कि एक सौ साल पुराने मामले में पीड़ित पक्ष को सुना नहीं जा रहा है। यह गलत है। इस मौके पर समिति के संरक्षक बृजमोहन अग्रवाल, दयानंद नागरानी, उमाशंकर माहेश्वरी, अनिल जैन, प्रमोद अग्रवाल, हर्ष गुप्ता, पंकज बंसल, मनोज अग्रवाल, अंशुल दौनेरिया, संजय खंडेलवाल आदि मौजूद रहे।