कृष्ण जन्माष्टमी पर शनिवार को मथुरा नगरी रंगबिरंगी रोशनी से जगमगा उठी। मध्यरात्रि को 12 बजे जैसे ही भगवान कृष्ण का प्राकट्य हुआ हर तरफ बधाई गूंजने लगी। घंटे-घड़ियाल और शंखनाद की ध्वनि आसमान तक पहुंची। भगवान के जयकारे लगने लगे। हाथी-घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की। नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की। हर तरफ जश्न का माहौल था। श्रीकृष्ण जन्मस्थान में लाखों लोग अपने कान्हा के जन्मोत्सव में शामिल हुए।
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कान्हा का अभिषेक करते साधु-संत
- फोटो : अमर उजाला
श्रीकृष्ण जन्मस्थान में शनिवार की रात को 12 बजे कान्हा के प्राकट्य के साथ ही महाआरती का आयोजन किया गया। ठाकुरजी को मोछर्लासन में विराजमान कर अभिषेक स्थल तक लाया गया। यहां जन्मभूमि न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के सानिध्य में ठाकुरजी का अभिषेक शुरू हुआ।
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चांदी की गाय के दूध से हुआ कृष्ण का अभिषेक
- फोटो : अमर उजाला
दूध, दही, शहद, घी, बूरा, यमुना जल से सेवायतों ने चांदी की 51 किलो की कामधेनु गाय के पयोधरों से आराध्य का पंचामृत अभिषेक किया गया। इससे पूर्व श्रीगणेश व नवग्रह का पूजन भी किया गया।
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जन्मस्थान परिसर स्थित भागवत भवन में भक्तों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
कृष्ण के अभिषेक के दौरान जन्मस्थान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। पुष्पवर्षा की गई। भगवान का प्राकट्य होने के बाद मथुरा में जगह-जगह पूजा अर्चना की गई। सभी मंदिरों में एक साथ शंखनाद किया गया।
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जन्मस्थान मंदिर के बाहर भक्तों की कतारें
- फोटो : अमर उजाला
शाम को करीब छह बजे से ही होलीगेट की तरफ से भक्तों की भीड़ जन्मस्थान की तरफ बढ़ने लगी थी। यहां राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों से आए लोग थे। जिस तरह भीड़ थी उस हिसाब से इन लोगों को होलीगेट से जन्मस्थान तक पहुंचने में ही पौन घंटे तक का वक्त लगा। जबकि सामान्य दिनों में 15 मिनट पैदल पहुंचने में लगते हैं।
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जन्मस्थान मंदिर के बाहर भक्तों की कतारें
- फोटो : अमर उजाला
गोवर्धन चौराहे से जन्मस्थान की तरफ बढ़ रही भक्तों की भीड़ में अलवर, डीग, कामा, नगर, भरतपुर, बयाना और हिंडौन के लोग थे। क्योंकि वाहन बंद थे लिहाजा सभी पैदल जन्मस्थान जा रहे थे। हर किसी में भारी उत्साह था। जुबां पर राधे-राधे की गूंज। गोकुल रेस्टोरेंट तिराहा से दिल्ली, फरीदाबाद, पलवल, कोसीकलां और छाता के लोग कान्हा की धुन में गाते बजाते जन्मस्थान जा रहे थे।
जन्मोत्सव कार्यक्रम में प्रस्तुति देतीं कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
जन्माष्टमी पर देश के कई राज्यों से मथुरा पहुंचे कलाकारों ने जगह-जगह अपनी प्रस्तुतियां देकर माहौल में चार चांद लगा दिए थे। जन्माष्टमी पर पांच हजार से ज्यादा मंदिरों को सजाया गया था। शाम के वक्त बादलों की गड़गड़ाहट के साथ चमकने वाली बिजली और रिमझिम बरसात ने भी बता दिया था कि कान्हा के जन्म की खुशी धरती पर ही नहीं बल्कि आसमान तक जश्न रहा।