'तूफानों से आंख मिलाओ, सैलाबों पे वार करो, मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो।' डॉ. राहत इंदौरी के इस शेर को हकीकत में बदलते देखना हो तो मथुरा की रहने वाली वीर नारी शशिदेवी के संघर्ष की गाथा पढ़िए, जो पति की शहादत के बाद खुद सैनिक बनकर देश सेवा कर रही हैं। जिले में शशिदेवी की तरह कई वीर नारियां हैं, जिनके पति देश सेवा में शहीद हो गए। पति की शहादत के बाद ये वीर नारियां अपने जज्बे और जुनून से जिंदगी से जंग लड़कर मिसाल पेश कर रही हैं।
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वीर नारी शशिदेवी और उनके पति मुकेश शर्मा
राया के गांव नगला भीम निवासी मुकेश चंद्र शर्मा बीएसएफ में थे। 19 दिसंबर 2009 को जम्मू के बारामुला में हुए आतंकी हमले में वो शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के बाद पत्नी शशिदेवी पर जिम्मेदारी आ गई थी। शशिदेवी ने भी कुछ दिन बाद बीएसएफ ज्वाइन कर ली। मौजूदा समय में उनकी पोस्टिंग पंजाब में है। वो दस साल के बेटे आर्यन का भी लालन पालन कर रही हैं। शशिदेवी का कहना है कि वो अपने बेटे को भी सेना में ही भेजेंगी। इसके लिए अभी से उसे तैयार कर रही हैं। शशि का कहना है कि पति के शहीद होने के बाद उनके सामने कई चुनौतियां आईं। लेकिन उन्होंने सबका सामना किया।
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शहीद लोकेन्द्र सिंह की पत्नी अंजू देवी अपने बच्चों के साथ
बलदेव के गांव बल्टीगढ़ी निवासी लोकेंद्र सिंह 7 जनवरी 2006 को कश्मीर में शहीद हो गए थे। लोकेंद्र के शहीद होने के बाद बच्चों की जिम्मेदारी परिवार पर आ गई थी। पत्नी अंजू अपने बच्चों का लालन-पालन कर रही हैं। वीरनारी अंजू गांव में पति का स्मारक बनवाने के लिए भी लड़ रही हैं। दरअसल प्रशासन ने स्मारक के लिए जमीन देने की घोषणा की थी। लेकिन अभी तक जमीन का आवंटन नहीं हो सका है। अंजू कई दफा अधिकारियों से मिल चुकी हैं। पूरे 13 साल हो गए संघर्ष करते करते लेकिन अभी तक प्रशासन स्मारक के लिए भूमि उपलब्ध नहीं करा सका है।
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शहीद पुष्पेन्द्र की मॉ महावीरी देवी व पिता तेज सिंह
सौंख क्षेत्र के गांव नगला खुटियां निवासी पुष्पेंद्र सिंह आर्मी में थे। उनकी तैनाती श्रीनगर के तंगधार सेक्टर में थी। 13 अगस्त 2018 को आतंकियों से लड़ते हुए पुष्पेंद्र शहीद हो गए थे। बताया जाता है कि मुठभेड़ में जांबाज पुष्पेंद्र ने आतंकियों को भी ढेर कर दिया था। पुष्पेंद्र की मां महावीरी देवी और पत्नी सुधा सिंह शहीद पुष्पेंद्र के सपने को पूरा करने का संकल्प लिए हैं। सुधा सिंह का कहना है कि उनके पति चाहते थे कि बेटा भी सेना में जाए। वो बेटे सिद्धार्थ को सेना में अफसर बनाएंगी। वह भी चाहती हैं कि उनका बेटा बड़ा होकर देश की सेवा करे। हमारे देश की सीमाओं का रखवाला बने।
छाता के गांव लाडपुर निवासी विक्रम सिंह 27 मार्च 2018 को कश्मीर में शहीद हो गए थे। शहीद विक्रम सिंह के दो बेटे हैं। शहीद की पत्नी रचना का कहना है कि वह अपने दोनों बेटों को फौजी बनाएंगी। विक्रम सिंह भी यही चाहते थे कि उनके बच्चे भी देश की सेवा करें। रचना दोनों बच्चों का बखूबी पालन कर रही हैं। इनके अलावा जिले में कई वीर नारियां है, जो अपने पति की शहादत के बाद बच्चों को पालन पोषण कर रही हैं और उन्हें सेना में भेजने की तैयारी करा रही हैं।