बाह में चंबल सफारी की खूबसूरत वादियों में घूमते घड़ियाल, उड़ते परिंदे जैव विविधता की दुनियाभर में मिसाल बने हुए हैं। ऐसा हो भी क्यों न, दुनिया भर में लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचे घड़ियाल और मगरमच्छों का कुनबा यहां पर तेजी से बढ़ रहा है।
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चंबल सफारी में पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
दुनिया में संकट में पड़ी चिड़ियों इंडियन स्कीमर, ब्लैक बिंग्ड स्टिल्ट, रुडी शैल्डक, ब्लैक नेक्ड स्टार्क, ब्लैक बेलीड टर्न, रिवर टर्न, बार हैडेड गूज, फ्लेमिंगो आदि के लिए नया आसरा बना है।
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चंबल में घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
डॉल्फिन के गोते, काले और चितकबरे हिरणों की रणचौकड़ी भी पर्यटकों को चंबल खींचकर लाती है। खास बात ये भी है कि दुनिया से लुप्त हो चुकी कछुओं की सात प्रजातियां भी चंबल में लगातार बढ़ रहीं हैं।
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चंबल सफारी में पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
चंबल सफारी जरार के केयर टेकर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि चंबल की जैव विविधता से प्रभावित होकर यहां आने वाले अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, जर्मनी आदि मुल्कों के पर्यटक इसे धरती का स्वर्ग मानने लगे हैं।
बाह के रेंजर आरके सिंह राठौर ने बताया कि चंबल में दुनिया भर से आने वाली चिड़ियां प्रजनन कर रही हैं। घड़ियालों का कुनवा लगातार बढ़ रहा है। यहां आने वाले पर्यटक चंबल की जैव विविधता को अनूठा बताते हैं।