बिजलीघर चौराहे से ऑटो पर स्टीकर लगाकर अवैध वसूली का खेल चल रहा है। स्टीकर लगे ऑटो को कहीं भी जाने की खुली छूट मिल जाती है। इसके लिए चालक को दबंग ठेकेदारों को हर रोज सौ रुपये चुकाने होते हैं। इस खेल में यातायात पुलिसकर्मियों के शामिल होने की आशंका है। बृहस्पतिवार को एसपी सिटी ने यह मामला पकड़ा। तीन चालकों से पूछताछ की तो जानकारी मिल गई। थाना रकाबगंज पुलिस को मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।
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ऑटो
- फोटो : अमर उजाला
बिजलीघर से तीन रूट पर ऑटो चलते हैं। इनमें बिजलीघर से कलक्ट्रेट, खेरिया मोड़ और मधु नगर हैं। इन तीन रूट पर तीन ठेकेदार चालकों से अवैध रूप से वसूली करते हैं। नीले, पीले और नारंगी रंग के स्टीकर लगाए जाते हैं। महीने में एक बार स्टीकर लगने के बाद ऑटो को खुली छूट मिल जाती है।
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एसपी सिटी ने मारा छापा
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पिछले दिनों स्टीकर लगाकर वसूली की शिकायत एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद को मिली थी। इस पर बृहस्पतिवार दोपहर को वह बिजलीघर पर पहुंच गए। कई ऑटो पर स्टीकर लगे मिले। इस पर चालकों से बात की। एसपी सिटी ने बताया कि चालकों ने तीन ठेकेदार के बारे में बताया हैं। तीनों का नगर निगम से ठेका नहीं है। इसके बावजूद ऑटो से वसूली कर रहे हैं। हर रूट पर अलग-अलग रंग के स्टीकर लगाए जाते हैं। इसके बाद ऑटो को किसी भी चौराहे पर खड़े होने और कहीं भी बिना रुके जाने की छूट मिल जाती है।
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ऑटो चालकों से पूछताछ करते एसपी सिटी
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चालकों ने बताया है कि यातायात पुलिस भी स्टीकर देखने के बाद रोकती नहीं है। एमजी रोड पर भी एंट्री मिल जाती है। मामले की जांच कराई जा रही है। रकाबगंज की फोर्ट चौकी प्रभारी को ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ऑटो से स्टीकर हटवाए जा रहे हैं।
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ऑटो
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ऑटो में पीछे की सीट पर तीन सवारियों को बैठाने का नियम है। इसके बावजूद चालक धड़ल्ले से ओवरलोड ऑटो दौड़ा रहे हैं। पिछले दिनों पुलिस लाइन रोड पर ऑटो के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। मगर, कुछ दिन बाद ही बंद हो गई।
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पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया
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भगवान टॉकीज और रामबाग पर ठेकेदार के गुर्गों को भी एसपी सिटी ने वाहन चालकों से पार्किंग शुल्क से अधिक की वसूली करते पकड़ा था। इस मामले में थाना न्यू आगरा और एत्माद्दौला में मुकदमे भी दर्ज कराए गए थे।
सबसे ज्यादा ऑटो बिजलीघर से चलते हैं। दो साल पहले तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक ने अभियान चलाकर इन्हें चौराहे से दूर कराया था। इनकी संख्या लगभग पांच सौ है। एक से 100 रुपये रोज का मतलब हुआ रोजाना 50 हजार और महीने में पांच लाख की वसूली।