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विश्व गौरैया दिवस: संकट से उबरी गौरैया नन्ही चिरैया, यमुना-चंबल के गांवों में फिर गूंजी चहचहाहट; देखें तस्वीरे

Fri, 20 Mar 2026 11:29 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

वन विभाग द्वारा घोंसला वितरण और पौधरोपण अभियान के चलते बाह, पिनाहट और जैतपुर क्षेत्र में गौरैया की संख्या फिर से बढ़ने लगी है। विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी यह चिड़िया अब यमुना और चंबल नदी की घाटियों के गांवों में दोबारा चहकती नजर आ रही हैं।
 
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विश्व गौरैया दिवस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर यमुना और चंबल की घाटियों से एक सुखद संदेश आ रहा है। कभी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी नन्हीं गौरैया, अब वन विभाग के घोंसला वितरण अभियान और सघन पौधरोपण के कारण बाह, पिनाहट और जैतपुर के गांवों में फिर से फुदकने लगी है। गौरैया की घटती आबादी को लेकर दुनिया भर के प्रकृति एवं पर्यावरण प्रेमी चिंतित हैं, लेकिन यमुना-चंबल के आंगन में फुदकती दिखने वाली गौरैया मन को सुकून देती है, चहचाहट लोगों को रोमांचित कर देती है।

एक दशक पहले संकट में पड़ी गौरैया को बचाने के लिए बाह, पिनाहट, जैतपुर रेंज के यमुना-चंबल के गांवों में वन विभाग ने पहल की। तीनों रेंज में घोंसले लगाए। चंबल सेंक्चुअरी बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज, सामाजिक रेंज के क्षेत्रीय वनाधिकारी अमित कुमार, जैतपुर के रेंजर कोमल सिंह ने बताया कि पिछले 10 साल से वन विभाग बीहड़ के गांवों में घरौंदे देकर ग्रामीणों को गौरैया के संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहा है।


 
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विश्व गौरैया दिवस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बीहड़ में पौधरोपण से भी गौरैया को घोंसले के लिए नये ठिकाने मिले हैं। पौध रोपड़ और घोंसले वितरित कर फैलाई जागरूकता का सुखद प्रमाण है कि बीहड़ से लेकर गांव तक गौरैया फुदकती हुई चहचाहती हुई दिखती है, तो मन को सुकून मिलता है।
 
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विश्व गौरैया दिवस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रजनन सीजन (मार्च-जून) में पेड़ों की झाड़ियों में घोंसले बनाए जाने के साथ ही वन विभाग निगरानी शुरू कर देता है। घोंसले में गौरैया 3 से 5 अंडे देती है। एक पखवाड़े में अंडों से चूजे निकलते हैं। करीब इतना ही समय चूजों के उड़ान भरने लायक होने में लगता है।


 

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विश्व गौरैया दिवस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पक्के घरों ने छीना आवास, कीटनाशक ने जिंदगी
दुनिया के 50 देशों में गौरैया के अस्तित्व पर संकट की कई बजह रहीं हैं। जैतपुर के रेंजर कोमल सिंह ने बताया कि कच्चे घरों पर पड़ने वाले छप्पर में गौरैया घोंसले बनाती थी। कच्चे घर की जगह पर पक्के मकान बन गये। जिससे गौरैया के घोंसले छिन गए। फसलों में कीटनाशकों के अंधाधुंध छिड़काव, मोबाइल टावरों के रेडिएशन से गौरैया के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। जिससे अस्तित्व का संकट पैदा हो गया था।

 
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विश्व गौरैया दिवस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
होप फॉर स्पैरो... इसके बिना जीवन संगीत अधूरा
हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों को इस प्यारी चिड़िया की घटती संख्या के बारे में जागरूक किया जा सके और इसे बचाने के लिए प्रेरित किया जाए। इस साल की थीम 'होप फॉर स्पैरो' का जिक्र कर बाह के साहित्यकार डॉ. शिवशंकर कटारे ने बताया कि हमारे घर-आंगन में फुदकने वाली गौरैया के बिना हमारा जीवन संगीत अधूरा है। गौरैया के प्रति लगाव और संरक्षण की भावना को बढ़ावा मिलना चाहिए।
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