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मथुराः होली की ये तस्वीरें आखों के रास्ते उतर जाएगी आपके दिल में

Tue, 06 Mar 2018 10:32 AM IST
नवीन गोयल, अमर उजाला कोसीकलां (मथुरा)
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हुरंगा होली - फोटो : अमर उजाला
फागुन में जेठ कहै भाभी... वाली कहावत रविवार को बठैन में देखने को मिली। बलराम ने झाड़ियों की ओट लेकर राधा से होली खेली। प्रेम रस रंग भरे हुरंगे की धमक बंब नगाड़ों की गूंज बठैन में सुनाई दी। बठैन पहुंचे जाव के हुरियारों के ऊपर हुरियारिनों ने जमकर लाठियां चलाकर शनिवार का बदला लिया। 
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बजाय ढोल-नगाड़े - फोटो : अमर उजाला
प्रेम से सराबोर होली को देखकर दूर दराज से आए श्रद्धालु ने प्रेम रस में डूबकर अबीर गुलाल की वर्षा कर जय-जयकार करने लगे। दोपहर करीब तीन बजे जाव के हुरियारे बलराम की प्रतीक झंडी को लेकर दाऊजी मंदिर पर एकत्रित हुए। मंदिर में भागन तै फागुन आयौ, हौरी खेलूंगी श्याम संग..., नंदी भागन तै फागुन आयौ, उनने चलाई पिचकारी, अरक जा, हमनै उडायौ गुलाल...सहित रसिया और ब्रजभाषा प्राचीन होली पदों के स्वर गूंजे। 
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विदेशी पर्यटकों ने लिया आनंद - फोटो : अमर उजाला
हुरंगे को देखने के लिए आसपास के गांवों के काफी ग्रामीण वहां एकत्रित हुए। समाज गायन के बाद जाव के हुरियारे ढोल-नगाड़े लेकर नाचते-कूदते चल रहे थे जो हाथों में ढप ढोल बजाते हुए गायन कर रहे थे। पीछे सींग की झाड़ियां लेकर युवक चल रहे थे। शोभायात्रा शाम साढ़े पांच बजे गांव के बाहर मैदान पर पहुंची। 

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हुक्के का उठाया लुत्फ - फोटो : अमर उजाला
हुरियारन जहां घूंघट ओढ़े और हाथों में लाठियां लिए स्थान-स्थान पर खड़ी थी और बरसाने की लट्ठमार होली की भांति लाठियों से हुरियारों पर लकड़ी के विशेष प्रकार से बने हलों पर वार कर रही थीं। गोल घेर में 35 फीट व्यास के आकार के गोले में हुरियारे भागते हुए हुरियारिनों की लाठियों के प्रहार को रोक रहे थे। मौसम खराब होने से आधा घंटे तक चले हुरंगे में बलदाऊ की जय, राधा रानी के जयघोष गूंजते रहे। 
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होली खूब बरसे लठ - फोटो : अमर उजाला
बठैन में छतों पर बैठी महिलाएं गुलाल को ऐसे उड़ा रही थीं कि जैसे आंधी आई हो। इसी तरह होली खेली गई। हर कोई हंसी, ठिठौली की फुहार के मध्य गुलाल, रंगों से सराबोर नजर आ रहा था। बठैन में हुरंगे के दौरान निकाली गई शोभायात्रा में सिरदारी के हाथों में लगे हुक्के सभी के आकर्षण का केंद्र बने थे। थोड़ी दूर चलने पर बुजुर्गों का दल रुक जाता और हुक्का गुड़गुड़ाने लग जाता। बुजुर्गों के रुकते ही ग्राम की बुजुर्ग महिलाएं माला पहनाकर स्वागत करतीं और बुजुर्ग एक विशेष प्रकार के बने प्रसाद को निकालकर दे रहे थे।
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