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ब्रज दूलह मंदिर: गोपियों से बचने के लिए यहां छिपे थे श्रीकृष्ण, होली पर जीवंत होती है यह परंपरा

Sat, 15 Feb 2020 06:01 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरसाना (मथुरा)
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ब्रज दूलह मंदिर में हुरियारिन - फोटो : अमर उजाला
ब्रज की अद्भुत होली विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां होली से जुड़ी कई परंपराएं आज भी जीवंत होती है। इनमें एक परंपरा के अनुसार बरसाना में आज भी भगवान श्रीकृष्ण की लाठियों से पिटाई होती है। कटारा हवेली स्थित ब्रज दूलह मंदिर में ब्रज की राधा स्वरूप हुरियारी कृष्ण को लाठियां मारती हैं। 
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ब्रज दूलह मंदिर - फोटो : अमर उजाला
बरसाना के कटारा हवेली स्थित ब्रज दूलह मंदिर को रूपराम कटारा ने बनवाया था। तभी से उनके परिवार की महिलाएं ब्रज दूलह के रूप में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करती हैं। ब्रज में केवल यही ऐसा मंदिर है, जहां होली पर विग्रह श्रीकृष्ण पर लाठियां पड़ती हैं। 
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लठामार होली (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
ब्रज दूलह मंदिर में पूजा केवल महिलाएं करतीं हैं। लठामार होली वाले दिन नंदगांव के हुरियारे कटारा हवेली पहुंच कर श्रीकृष्ण से होली खेलने को कहते हैं। कटारा परिवार द्वारा हुरियारों का स्वागत किया जाता है। उनको भाग और ठंडाई पिलाई जाती है। 

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ब्रज दूलह मंदिर की सेवायत की राधा कटारा - फोटो : अमर उजाला
ब्रज दूलह मंदिर की सेवायत की राधा कटारा ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण कटारा हवेली में ब्रज दूलह के रूप में विराजमान हैं। यहां सभी व्यवस्थाएं महिलाएं करती हैं। होली के दिन लठामार होली की शुरुआत ब्रज दूलह के साथ होली खेलते हुए होती है।
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श्रीकृष्ण का विग्रह - फोटो : अमर उजाला
पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण गोपियों को कई तरह से परेशान किया करते थे। कभी उनकी मटकी फोड़ देते तो कभी चीरहरण कर लेते। एक बार बरसाना की गोपियों ने कृष्ण को सबक सिखाने की योजना बनाई। उन्होंने कृष्ण को उनके सखाओं के साथ बरसाना होली खेलने का न्यौता दिया। श्रीकृष्ण और ग्वाल जब होली खेलने बरसाना पहुंचे तो उन्होंने देखा कि बरसाना की गोपियां हाथ में लाठियां लेकर खड़ी हैं। लाठियां देख ग्वाल-बाल भाग गए। 
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ब्रज दूलह मंदिर में हुरियारिन - फोटो : अमर उजाला
जब श्रीकृष्ण अकेले पड़ गए तो गायों के खिरक में जा छिपे। जब गोपियों ने कान्हा को ढूंढा और यह कह कर बाहर निकाला कि ‘यहां दूल्हा बन कर बैठा है, चल निकल बाहर होली खेलते हैं’। इसके बाद गोपियों ने श्रीकृष्ण के साथ जमकर होली खेली। तभी से भगवान का एक नाम ब्रज दूलह भी पड़ गया। 
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