गंगा की धारा पहले के मुकाबले अब ज्यादा साफ नजर आ रही है। इसे देख कर घाट के किनारे रहने वाले लोग बहुत खुश हैं। गंगा घाटों पर भी सफाई बनी हुई है। फूल, प्रसाद, गंगाजली आदि की दुकानें बंद होने से केवल गंगा की कल-कल करती धारा की ध्वनि ही सुनाई दे रही है।
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गंगा कछला पुल (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
जिले के सोरों तीर्थनगरी के पास स्थित लहरा घाट पर भी गंगा का पानी साफ और अविरल नजर आ रहा है। यहां कछला घाट के मुकाबले पानी ज्यादा साफ है। घाट पर केवल मछली पकड़ने वाले ही नजर आते हैं। कछला घाट का भी यही हाल है। केवल अंतेष्टि में शरीक होने वाले लोग ही घाट पर आते हैं। आम तौर पर कछला घाट पर बहुत भीड़ देखी जाती है।
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फूल, प्रसाद, गंगाजली आदि की बंद दुकान
- फोटो : अमर उजाला
राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि राज्यों के श्रद्धालु यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं, लेकिन लॉकडाउन के कारण इन श्रद्धालुओं की यहां कोई आमद नहीं है। गंगा की सैर कराने वाले नाविक भी नदारद हैं। उनकी नाव जरूर किनारे पर खड़ी हैं।
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सोरों में हरि की पौड़ी की तस्वीर
तीर्थनगरी सोरों की हरि की पदी के हालात भी यही हैं। गंगाघाट के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि काफी समय बाद गंगा का पानी इतना स्वच्छ व निर्मल दिख रहा है।
लॉकडाउन के कारण कोई भी श्रद्धालु नहीं आ रहा। केवल अंतिम संस्कार के लिए ही कुछ लोग पहुंचते हैं। जो अंतिम संस्कार के बाद स्नान करके वापस हो जाते हैं। गंगा का पानी पहले से अधिक साफ हुआ है। कचरा भी नहीं है। - छोटे लाल, गंगाभक्त।
गंगा का पानी साफ हुआ है। लोग खुद ही गंगा को मैला बना रहे थे। अब सब कुछ बंद होने के कारण कचरा गंगा में नहीं गिर रहा, लेकिन लोग गंगा में मछली का शिकार करते हैं उस पर रोक जरूरी है। - श्रीकृष्ण, पुजारी, कछला।