अंधड़-बारिश और ओलों से रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है, पर अधिकतर जिलों से कृषि विभाग के अधिकारियों ने फसलों को कोई नुकसान न होने की रिपोर्ट भेज दी है। खेतों में खड़ी पकी फसल खराब होने से जहां किसान मुसीबत में है, वहीं अधिकारियों की शुरुआती रिपोर्ट से उन्हें मुआवजा मिलने की उम्मीद न के बराबर है।
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ओलावृष्टि ने बर्बाद की फसल
- फोटो : अमर उजाला
आंधी के बाद ओलावृष्टि ने भले ही किसानों की कमर तोड़ दी हो लेकिन तीन तहसीलों के किसानों को प्राकृतिक आपदा का लाभ नहीं मिल पाएगा। प्रशासन की सर्वे रिपोर्ट में सदर, बाह और खेरागढ़ तहसील में ओलावृष्टि से 33 फीसदी से कम नुकसान हुआ है, जोकि प्राकृतिक आपदा के दायरे में नहीं आता।
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फसल बर्बाद
- फोटो : अमर उजाला
शासन को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, आगरा में 3102 हेक्टेयर में खड़ी गेहूं की फसल को क्षतिग्रस्त बताया गया है। ग्राम पंचायतवार फसल को 33 फीसदी या उससे ज्यादा नुकसान होने पर ही मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। प्रशासन ने शनिवार सुबह सभी तहसीलों में ओलावृष्टि से हुए नुकसान के सर्वे के आदेश दिए।
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ओलावृष्टि से बर्बाद फसलें
- फोटो : अमर उजाला
इसके अनुसार, जिले में कोई जन या पशु हानि नहीं हुई। सदर, बाह और खेरागढ़ तहसील में फसल हानि का भी सर्वे पूरा हो गया है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राकेश कुमार मालपाणी ने बताया कि तीन तहसीलों के सर्वे में प्राकृतिक आपदा से 33 फीसदी से कम नुकसान हुआ है। एत्मादपुर, फतेहाबाद और किरावली तहसील की सर्वे रिपोर्ट भी रविवार तक आ जाएगी।
भाजपा नेता राजकुमार चाहर का कहना है कि फतेहपुर सीकरी, अछनेरा, किरावली, अकोला, खेरागढ़ में ओलावृष्टि से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं। उन्होंने किसानों के बिजली बिल माफ करने तथा अन्य सरकारी देय की वसूली भी स्थगित करने की मांग की है।