भीषण गर्मी और लू के कारण बीमारों की संख्या तेजी से बढ़ गई है, मंगलवार को एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 3000 से अधिक मरीज पहुंचे। डॉक्टरों ने लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप से बचने और लू के लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज लेने की सलाह दी है।
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एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की लगी भीड़। अमर उजाला
भीषण गर्मी और लू के थपेड़े ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गर्मी की चपेट में आकर लोग बीमार होने लगे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मंगलवार को ही ओपीडी में कुल 3072 मरीज पहुंचे थे।
लू, चक्कर आना, बेहोशी, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से पीड़ित लोग बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय सबसे बड़ा खतरा लू का है। यह सीधे दिमाग और शरीर दोनों को प्रभावित करता है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी हो सकता है। मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि लगातार बढ़ते तापमान के कारण शरीर में पानी की कमी तेजी से हो रही है। इससे लोग कमजोरी, चक्कर और बेहोशी का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने बाहर जाते समय पानी की बोतल साथ रखने की सलाह दी।
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आगरा में भीषण गर्मी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि प्यास न लगने पर भी हर आधे घंटे में पानी पीते रहें। इससे शरीर का तापमान नियंत्रित बना रहेगा और सिर को ढककर रखना भी बेहद जरूरी है। मेडिसिन विभाग में 697, ऑर्थोपेडिक में 336 और त्वचा विभाग में 210 मरीज देखे गए।
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सड़क पर गर्मी से बचने के लिए युवाओं ने ढका सिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लू के लक्षण और बचाव
लू लगने के दौरान तेज बुखार, भ्रम की स्थिति और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके साथ ही तेज धड़कन, बेहोशी और शरीर का अत्यधिक गर्म होना भी इसके संकेत हैं। डॉक्टरों ने इन लक्षणों पर तुरंत ध्यान देने और चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी है। पर्याप्त पानी पीना और धूप से बचना इसके बचाव के प्राथमिक तरीके हैं।
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आगरा की सड़कों पर पसरा सन्नाटा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जिम जाने वाले रखें विशेष ध्यान
चिकित्सक ने विशेष रूप से जिम जाने वाले युवाओं को सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ज्यादा पसीना निकलने से अधिक कैलोरी बर्न होने की सोच खतरनाक हो सकती है। भीषण गर्मी में भारी वर्कआउट और टाइट कपड़े शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। जिम करने वालों को ढीले और हल्के कपड़े पहनने चाहिए। शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भीषण गर्मी में पानी पीता युवक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
स्ट्रोक-हार्ट अटैक के बढ़ सकते हैं मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तेज गर्मी के संपर्क में रहने से हृदय गति और ब्लड प्रेशर पर सबसे ज्यादा असर देखा जाता है। ब्लड प्रेशर सामान्य से अधिक होने के कारण दिल का दौरा और हृदय संबंधी अन्य समस्याओं के साथ स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। शोध से पता चलता है कि 50 से अधिक तापमान में हृदय संबंधी बीमारियों (दिल या रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करने वाली स्थितियां) से होने वाली मौतों की संख्या दो से तीन गुनी हो सकती है।