वृंदावन में कान्हा के जन्म को लेकर हर कोई प्रफुल्लित है। लेकिन कोविड-19 के चलते मंदिर भक्तों के लिए बंद हैं, बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। एक्का दुक्का श्रद्धालु मंदिरों तक पहुंच रहे हैं तो वह भगवान के मुख्य द्वार से ही प्रणाम कर वापस लौट रहे हैं।
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के पास बाजार में कुछ दुकानें खुली तो कुछ बंद रहीं। भगवान की पोशाकों की दुकान पर ग्राहक नजर नहीं आए। कुछ भक्त अपने लाडले के लिए फूलों के हार खरीदते दिखाई दिए। गलियों में जो लोग नजर आए उनमें स्थानीय ज्यादा थे। बाहर से आये कुछ भक्त मंदिर के द्वार पर पहुंचकर अपने आराध्य को मन से ही निहारने का प्रयास करते देखे गए। भक्तों ने अपने लाडले को वहीं से प्रणाम किया और फिर वापस हो लिए।
ठाकुर द्वारिकाधीश मंदिर में अभिषेक करते सेवायत
- फोटो : अमर उजाला
वृन्दावन के दूसरे प्रमुख मंदिर राधारमण, राधा दामोदर, शाह जी का भी यही हाल है। इन तीनों मंदिरों के अंदर दिन में ही अभिषेक किया गया।
पिछले साल जन्माष्टमी को याद करें तो इस बार सबकुछ फीका है। पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के मंदिर ठाकुर द्वारिकाधीश में अजन्मे का जन्म बड़ी धूमधाम से मनाया गया। मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि प्रातः काल 6:15 पर ठाकुर जी के मंगला के दर्शन खोलें और 6:30 पर ठाकुर जी का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ।
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बांके बिहारी मंदिर में भक्तों की भीड़ (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इस दिन बांके बिहारी मंदिर से जुड़ी गलियों में भक्तों को जगह नहीं मिलती थी। दर्शन के लिए लंबी कतार लगती थी, तब जाकर दर्शन होते थे। इसमें भी घंटों का समय भक्तों को लगता था। इस बार द्वार पर दस्तक देकर चले आए।
श्री कृष्ण जन्मस्थान के भागवत भवन मंदिर में भगवान श्री राधा कृष्ण
- फोटो : अमर उजाला
श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर में भी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक है। बुधवार को जन्मोत्सव के मुख्य कार्यक्रम में राधा-श्रीकृष्ण की पूजा हुई। जिसे कराने वाले आचार्य के साथ आयोजन से जुड़े लोग भी सीमित संख्या में ही सम्मिलित हुए। बुधवार को श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर होने वाले जन्मोत्सव के लाइव दर्शन श्रद्धालु टेलीविजन और सोशल मीडिया के माध्यम से कर सकेंगे। जन्मोत्सव के अलौकिक क्षणों का सजीव प्रसारण किया जाएगा। राधा-कृष्ण की आरती भी सीमित संख्या के साथ हुई।