भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी गाय आज उनकी ही नगरी में चारा-पानी के लिए मारी-मारी फिर रही हैं। सड़कों पर लगे कूडे़ के ढेर में निवाला ढूंढ रही हैं। इनके लिए न खाने की व्यवस्था है न बीमार होने पर उपचार का कोई प्रबंध। हां, धर्म और आस्था की इस नगरी में गोपाष्टमी पर अवश्य कुछ समाजसेवी संगठन और धर्मावलंबी गो-पूजन की परंपरा का निर्वहन करेंगे।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 6
खुले में घूम रहा गोवंश
- फोटो : अमर उजाला
पशुपालन विभाग की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक मथुरा जनपद में दो लाख गोवंश मौजूद है। इसमें 35 हजार से ज्यादा गोवंश के लिए रहने और खाने के लिए कोई आसरा नहीं है। उनकी सुध लेने वाला भी कोई नहीं है। वो खुले में रहते हैं। इसमें कई हजार गोवंश मथुरा-वृंदावन की सड़क और गलियों में विचरण करते हुए कभी भी देखा जा सकता है।
विज्ञापन
3 of 6
गिरिराज गोवर्धन पर्वत पर चरती गायें
चारे की स्थाई व्यवस्था न होने के कारण ऐसी गाय कूड़े को ही अपना निवाला बनाती हैं। हालांकि इनके लिए शहर में 8 गोशाला, 7 कान्हा गोशाला और 5 कांजी हाउस हैं, लेकिन यह भी बेसहारा धूमती गाय को सहारा नहीं दे पा रही हैं।
4 of 6
कचरा खाता गोवंश
- फोटो : अमर उजाला
पिछले साल दिसंबर माह में खुले में घूमने वाली गायों से फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए 40 अस्थाई गोशाला बनाई गई थीं। इनमें से 29 गोशाला कुछ माह बाद ही बंद हो गई हैं। 11 गोशाला ही संचालित हो रही हैं, जहां 3100 गोवंश को आसरा मिला हुआ है।
विज्ञापन
5 of 6
गाय, गौशाला (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
आवारा गाय की बढ़ती संख्या सभी के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। किसान इनके द्वारा फसल बर्बाद किए जाने से परेशान रहते हैं तो शहर में सड़क दुर्घटनाओं का ये कारण भी बनती हैं। दरअसल शहर में अनेक प्रतिदिन दूध निकालने के बाद इन्हें खुले में छोड़ते हैं तो गांव में किसान अनुपयोगी होने पर गाय को घर से निकाल देते हैं।
आंकड़ों में गाय
-जनपद में गोवंश- 2 लाख
-आवारा गोवंश-35 हजार
-जनपद में गोशाला-141
-अस्थाई गो आश्रय स्थल-40
-शहरी गोशाला-08
-कान्हा गोशाला 07, कांजी हाउस 05
-जनपद में अपंजीकृत गोशाला-42