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एक स्कूल ऐसा भी : जहां बैलगाड़ियों से पढ़ने आती हैं छात्राएं, 12वीं तक मिलती है निशुल्क शिक्षा

Tue, 26 Jul 2022 05:27 PM IST
मुकेश कुमार राजीव अग्रवाल, अमर उजाला वृंदावन (मथुरा)
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बैलगाड़ी में बैठी छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
आधुनिकता के दौर में प्राचीनता देखनी है तो ब्रज में आइए। यहां आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपरा का संगम देखने को मिलता है। 21वीं सदी के तेज रफ्तार और लग्जरी वाहनों के जमाने में यहां बैलगाड़ी (बुल पावर) से विद्यार्थी स्कूल आते हैं। वृंदावन की एक शिक्षण संस्था ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को स्कूल लाने-ले जाने के लिए बैलगाड़ी का प्रयोग कर रही है। शिक्षण संस्था द्वारा बैलगाड़ी के प्रयोग से जहां कुछ लोग आश्चर्यचकित होते हैं, वहीं कुछ लोग इसे भारतीय संस्कृति के लिए आदर्श कदम मानते हैं। विद्यालय ने इस अनोखे स्कूल वाहन का नाम बुल पावर दिया है।

चैतन्य बिहार कॉलोनी स्थित संदीपनि मुनि शिक्षण संस्था ग्रामीण क्षेत्रों की बच्चियों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करती है। स्कूल में कक्षा 1 से 12वीं तक की लगभग 1500 छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इनमें गांव सुनरख, कीकी का नगला, गोपलगढ़, गांव राजपुर, देवी आटस आदि गांवों की बच्चियों पढ़ने आती हैं। संस्था ने बच्चों को लाने ले जाने के लिए वैन, बस, रिक्शा के बजाय दो बैलों से चलने वाली एक आकर्षक झोपड़ीनुमा बैलगाड़ी बनवाई है।


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स्कूल वाहन बुल पावर - फोटो : अमर उजाला
संदीपनि मुनि शिक्षण संस्था के पीआरओ पार्थ सारथी के मुताबिक यह योजना लगभग 12 वर्ष से चल रही है। एक बैलगाड़ी (बुल पावर) में 25 बच्चों से अधिक बैठ लेते हैं। स्कूल की कुल 11 बैल गाड़ियां संचालित हैं।
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संदीपनि मुनि स्कूल का वाहन बुल पावर - फोटो : अमर उजाला
पार्थ सारथी का कहना है कि बैलगाड़ी से वायु और ध्वनि प्रदूषण के अलावा तेल की बचत और दुर्घटना की संभावना भी ना के बराबर होती है। पारंपरिक वाहनों में संरक्षित पशु को बचाना भी एक ध्येय रहता है। इसका संचालन इटली के रघुनाथ द्वारा किया जाता है, जिन्हें अब भारत की नागरिकता मिल चुकी है।

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बैलगाड़ी में बैठी छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
इन बैलगाड़ियों से लगभग छह किलोमीटर की परिधि के बच्चों को स्कूल ले आया जाता है। यह बैलगाड़ियां तंदुरुस्त बैलों से चलाई जाती हैं। बैलगाड़ी में बच्चों को धूप और बारिश से बचाने के लिए फाइबर शीट से ऊपर हट बनाई गई, वहीं बैलगाड़ी को चारों ओर से लकड़ी के पट्टों से कवर किया गया है। जिसके ऊपर जाली लगाई गई है, साथ ही बैलगाड़ी में बच्चों के लिए सीढ़ियां लगी हैं और पीछे गेट पर जाली लगी है। 
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संदीपनि मुनि स्कूल का वाहन बुल पावर - फोटो : अमर उजाला
बैलों के गले में घुंघरू घंटी बजती हैं। इससे राह चलते लोगों को पता चल जाता है कि कोई आ रहा है। लगातार एक रास्ते पर चलते रहने के कारण बैल अपने आप बच्चों के उतरने वाले स्थान पर रुक जाते हैं। बच्चों को भी बैलों से बड़ा प्यार है।
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संदीपनि मुनि स्कूल के वाहन बुल पावर - फोटो : अमर उजाला
संदीपनि मुनि स्कूल के प्रबंधक नीरज सहगल ने बताया कि बैलगाड़ियों में नित्य प्रतिदिन गाते-बजाते हुए छात्राओं को स्कूल आना बहुत भाता है। ग्रामीण रास्तों पर इससे सुरक्षित और बेहतर कोई साधन नहीं है। इससे वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण के अलावा तेल की बचत तथा दुर्घटना की संभावना नहीं रहती है। पारंपरिक वाहनों में बुल पावर को बचाना भी एक ध्येय रहता है।
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बुल पावर में बैठीं छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
संदीपनि मुनि स्कूल के ब्रांड एंबेसडर फिल्म अभिनेता विवेक ओबरॉय हैं। विवेक ओबरॉय इस विद्यालय के बच्चों के साथ अपना जन्मदिन मनाते हैं। सुष्मिता सेन सहित कई नामचीन हस्तियां यहां आ चुकी हैं।
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