आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज की जनरल ओपीडी बंद होने से मरीज भटक रहे हैं। न इन्हें उपचार मिल पा रहा है और न निशुल्क दवाइयां। सस्ती दरों पर जांच बेमानी है। पहले जून-जुलाई में रोजाना ढाई हजार तक मरीज ओपीडी में आते थे। इनके लिए टेलीमेडिसिन की सुविधा शुरू की गई लेकिन इस पर रोजाना 150 से कम लोगों ने चिकित्सकों से परामर्श लिया। शहर के बाहरी इलाके और देहात में छोटे क्लीनिक नहीं खुलने से मरीजों की दिक्कत और बढ़ गई है।
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मरीज को स्ट्रेचर ले जाते परिवारीजन
- फोटो : अमर उजाला
एसएन मेडिकल कॉलेज में कोविड वार्ड बन जाने के बाद से नेत्र, हड्डी, त्वचा, दंत रोग, वक्ष रोग समेत जनरल ओपीडी बंद है। पहले माना जा रहा था कि लॉकडाउन खत्म होने पर ओपीडी शुरू कर दी जाएगी लेकिन अनलॉक -1 में ऐसा नहीं हो सका।
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एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी
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पिछले साल इन दिनों में एसएन में नेत्र रोग में 130-150, वक्ष रोग में 150-180, हड्डी रोग विभाग 160 से 190, दंत रोग में 90 से 110, ईएनटी में 130 से 150, त्वचा रोग विभाग में 360 से 400 व अन्य विभागों सहित कुल लगभग 2500 मरीज रोजाना आते थे। इनको परामर्श मिलने के साथ ही दवाएं भी मिलती थीं, लेकिन कोरोना वायरस के चलते जनरल ओपीडी नहीं हो रही। हालत यह है कि सामान्य दिनों में एक-दो दिन में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या टेलीमेडिसिन का लाभ लेने वाले एक महीने के मरीजों की संख्या बराबर है।
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अस्पताल की ओपीडी में लगी भीड़
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एसएन अस्पताल में इलाज के साथ ही जरूरतमंद मरीज निशुल्क दवा और सस्ती जांचों के लिए भी आते हैं। ऐसे लोग जो प्राइवेट में महंगी जांचों का खर्च नहीं उठा सकते और दवाएं खरीदना भी मुश्किल है वे सरकारी अस्पतालों का रुख करते हैं, लेकिन अब टेलीमेडिसिन सुविधा में उन्हें सिर्फ परामर्श मिल रहा है, दवाएं नहीं तो ऐसे मरीज ज्यादा परेशान हैं।
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स्क्रीनिंग करती स्वास्थ्य विभाग की टीम
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एसएन मेडिकल कॉलेज में ट्राएज ओपीडी चल रही है, इसमें कोरोना संदिग्ध लोगों की स्क्रीनिंग करने के साथ उनके नमूने भी लिए जाते हैं। इमरजेंसी के मरीजों को भी यहीं भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है।
एसएन मेडिकल कालेज में निरीक्षण करते प्राचार्य डॉ संजय काला (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए जनरल ओपीडी बंद है, टेलीमेडिसिन से परामर्श और किसी भी बीमारी के गंभीर मरीज का इलाज मिल रहा है।