आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। इस सरकारी मेडिकल कॉलेज में मरीजों को इलाज मिलना तो दूर बीमार व्यवस्थाओं से उनकी हालत और खराब हो जाती है। कभी इलाज नहीं मिलता तो कभी स्ट्रेचर और एंबुलेंस। दिव्यांग मरीजों को शौचालय जाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज का शौचालय खुद विकलांग है।
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शौचालय के टूटे दरवाजे से बाहर निकलता मरीज
- फोटो : अमर उजाला
एसएन मेडिकल कॉलेज में दिव्यांगों के लिए बने शौचालय का टूटा दरवाजा बंद पड़ा है। वहीं गंदगी की भी भरमार है। मरीजों को शौचालय जाने के लिए टूटे दरवाजे से अंदर घुसना पड़ता है। जिससे मरीजों को परेशानी का सामने करना पड़ता है। कभी कभी मरीजों को चोट भी लग जाती है।
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एसएन मेडिकल कालेज
- फोटो : अमर उजाला
इस सरकारी मेडिकल कॉलेज का यह हाल तब है, जब इसे मिनी पीजीआई का दर्जा दिलाने के लिए कॉलेज प्रशासन और नेताजी पैरवी में लगे हुए हैं। कॉलेज में चिकित्सकीय सुविधाएं किस हाल में है, यह तस्वीरें इसकी पोल खोल रही हैं।
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कंधे पर ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर जाता तीमारदार (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
मरीजों को ले जाने के लिए स्ट्रेचर न मिलना तो यहां आम बात हो गई है। कई बार तीमारदार कंधे पर ऑक्सीजन सिलिंडर रखकर मरीजों को वार्ड तक लेकर पहुंचे हैं।
व्यवस्थाओं की पोल खोलते मामले:
24 जून: स्ट्रेचर न मिलने पर तीमारदार को अपने मरीज को स्कूटर पर बांधकर ले जाना पड़ा।
29 जून: बरहन की मरीज ललिता को स्ट्रेचर नहीं मिला। तीमारदार कंधे पर रखकर ले गया।
13 जुलाई: दीपमाला अपने बीमार बच्चे को गोद में लिए हुए थी, पति कंधे पर रखकर ले गया।
24: जुलाई: कागारौल के राकेश अपने कैंसर रोगी पिता को स्ट्रेचर पर लादकर बच्चों से धक्का लगवाते ले गए।
27 जुलाई: स्ट्रेचर न मिलने पर बीमार पत्नी को गोद में उठाकर आठ मंजिल पर ले गया पति।
25 अगस्त: स्ट्रेचर न मिलने पर कंधे पर ऑक्सीजन सिलिंडर रखकर तीमारदार मरीज को लेकर पहुंचा।