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खुलासा: आगरा में कोर्ट परिसर से फरार गैंगस्टर ने जेल के कम्प्यूटर से की थी वीडियो कॉल, बंदी भी चलाते थे फेसबुक

Wed, 20 Jul 2022 12:05 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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गैंगस्टर विनय श्रोत्रिय - फोटो : अमर उजाला
आगरा के न्यायालय परिसर से फरार गैंगस्टर विनय श्रोत्रिय चार बंदियों की मदद से जेल की सुरक्षा को तार-तार कर रहा था। अपने साथियों को फेसबुक मैसेंजर से मैसेज भेजने और वीडियो कॉल करने के लिए जेल के कम्प्यूटर का प्रयोग करता था। जेल कार्य में लगे रायटर बंदी उसकी सहायता करते थे। ये बंदी भी जेल के कम्प्यूटर पर फेसबुक चलाते थे। जेल प्रशासन की जांच में यह बात सामने आई है।
 
फिरोजाबाद का रहने वाला विनय श्रोत्रिय थाना बरहन पुलिस ने पकड़ा था। उस पर लूट सहित अन्य मामले दर्ज हैं। 13 जुलाई को उसे दीवानी पेशी पर लाया गया था। जहां से वह फरार हो गया था। मामले में थाना न्यू आगरा में मुकदमा दर्ज है। पुलिस की गिरफ्त में आए उसके एक साथी सोनू ने पूछताछ में उसने बताया था कि विनय उससे जेल पीसीओ के अलावा फेसबुक मैसेंजर पर मैसेज भेजकर और वीडियो कॉल से बात करता था, जिसके बाद जांच की गई थी।
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आगरा जिला जेल - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय जेल के प्रभारी डीआईजी-वरिष्ठ अधीक्षक वीके सिंह ने बताया कि फेसबुक चलाने के लिए जेल के इंटरनेट का प्रयोग किया गया था। जिला जेल में लाइब्रेरी के पास लगे एक कम्प्यूटर पर इंटरनेट की सुविधा है। इसमें पेशी पर आने-जाने वाले बंदियों का लेखा-जोखा रखा जाता है। 
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गैंगस्टर विनय श्रोत्रिय - फोटो : अमर उजाला
कम्प्यूटर पर नए बंदियों की फोटो के साथ जानकारी अपलोड की जाती है। इसके लिए वेब कैमरा लगा है। कम्प्यूटर पर दो रायटर बंदी कार्य कर रहे थे। लाइब्रेरी में विनय काम करता था। दो और बंदी अन्य कार्यों में लगे थे। पांचों ने फायदा उठाया। विनय की फरारी के बाद पुलिस के सहयोग से हुई जांच में यह पता चला।

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केंद्रीय कारागार आगरा - फोटो : अमर उजाला
अधीक्षक ने बताया कि चार बंदियों में से दो सजायाफ्ता हैं। उन्हें केंद्रीय जेल में स्थानांतरित कर दिया है। दो बंदी विचाराधीन हैं। दोनों को अलग बैरक में भेज दिया गया है। उनकी मुलाकात और जेल पीसीओ से बात पर भी रोक लगा दी गई है।
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कोर्ट परिसर से फरार हुआ था गैंगस्टर विनय - फोटो : अमर उजाला
जेल के कार्यों में अक्सर बंदियों को लगाया जाता है। इसमें उनकी जेल में रहने की अवधि और आचरण के साथ योग्यता भी देखी जाती है। हिसाब-किताब से संबंधित कार्य की जिम्मेदारी पढ़े-लिखे बंदियों को दी जाती है। इन्हें रायटर कहा जाता है। पांच बंदी जेल में लगे कम्प्यूटर का गलत उपयोग कर रहे थे। इसकी भनक जेल के कर्मचारियों को भी नहीं थी। केंद्रीय जेल के वरिष्ठ अधीक्षक-प्रभारी डीआईजी वीके सिंह का कहना है कि कर्मचारियों की लापरवाही है। इस संबंध में जांच की जा रही है।
 
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