गणेश चतुर्थी का महापर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी 31 अगस्त दिन बृहस्पतिवार को है। गणेश चतुर्थी को लेकर आगरा में तैयारियां जोरों पर हैं। जगह-जगह गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। 31 अगस्त से शुरू होने वाले उत्सव को लेकर भक्तों के साथ मूर्तिकार में भी उत्साह है। इस बार शहर में सबसे बड़ी गणपति की प्रतिमा सदर बाजार में स्थापित होगी। इसकी ऊंचाई 22 फिट होगी।
गणेश उत्सव के लिए इस प्रतिमा को बनाने को काम दो महीने से चल रहा है। मूर्तिकार लोकेश व उनके भाई नीलेश ने प्रतिमा बनाई है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रतिमा आगरा की सबसे बड़ी है। गणपति बप्पा आराम मुद्रा में बैठे हैं। सिर पर पगड़ी बंधी है। ऊपर माता रानी हैं जो राक्षसों का वध कर रही हैं। दायीं ओर तीन नाग बनाए गए हैं और दोनों और रिद्धी व सिद्धी विराजमान हैं। इस प्रतिमा की कीमत करीब दो लाख रुपये है।
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Ganesh Chaturthi 2022
- फोटो : अमर उजाला
ईको फ्रेंडली है प्रतिमा
मूर्तिकार ने बताया कि 22 फीट की प्रतिमा पूरी तरह से ईको फ्रेंडली बनाई गई है, ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। इसे बनाने में पराली, बल्ली, बरगे, पंचगव्य, लकड़ी और मिट्टी का प्रयोग किया गया है। बांस का प्रयोग नहीं किया गया है। वे प्रतिमा बनाते समय उसमें छायादार और फलदार पौधों के बीज डाल देते हैं। इसमें उन्होंने आम का बीज डाला है। विसर्जन के बाद आम के पौधे उग आएंगे।
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गणेश चतुर्थी
- फोटो : istock
महाराष्ट्र के कारीगरों ने बनाई
मूर्तिकार लोकेश व नीलेश ने बताया कि वो महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और 2017 से आगरा में ईको फ्रेंडली मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं। महाराष्ट्र का होने के कारण गणेश प्रतिमाओं को अच्छा रूप देते हैं। अब लोग ज्यादातर ईको फ्रेंडली मूर्ति लेना ही पसंद करते हैं।
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गणेश जी की कृपा प्राप्त करने के लिए संकष्टी चतुर्थी पर दूर्वा की गांठे और मोदक अर्पित करें (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : istock
गणपति स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी की तिथि आरंभ: 30 अगस्त, मंगलवार, दोपहर 03:34 मिनट
गणेश चतुर्थी की तिथि समाप्त: 31 अगस्त, बुधवार, दोपहर 03:23 मिनट ।
गणपति स्थापना का मुहूर्त: 31 अगस्त, बुधवार, प्रातः 11:05 से शुरू होकर 1 सितंबर, रात्रि 01:38 तक रहेगा।
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गणेश चतुर्थी
- फोटो : अमर उजाला।
इस तरह करें गणपति स्थापना
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र के अनुसार, पीले वस्त्र पर चावल का स्वास्तिक बनाकर उस पर भगवान श्रीगणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करें। फिर पंचोपचार व षोड्षाचार पूजन करें। भगवान गणेश जी को विशेष रूप से हरी दुर्वा चढ़ाएं, घी का दीपक जलाएं। मोदक, पंच मेवा, पांच फलों का भोग लगाएं। नारियल, तांबुल व कमल गट्टे, सुपारी व लौंग इलायची आदि चढ़ाएं।
1- गणेश चतुर्थी पर व्रत करने वाले जातक सुबह स्नान करने के बाद सोने, तांबे, मिट्टी की गणेश प्रतिमा लें।
2- एक कोरे कलश में जल भरकर उसके मुंह पर कोरा वस्त्र बांधकर उसके ऊपर गणेश जी को विराजमान करें।
3- गणेश जी को सिंदूर व दूर्वा अर्पित करने के बाद 21 लडडुओं का भोग लगाएं।
4- पांच लड्डू गणेश जी को अर्पित करके शेष लड्डू गरीबों या ब्राह्मणों को बांट दें।
5- दस दिन तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान सांयकाल के समय गणेश जी का पूजन करना चाहिए।
6- इस दिन गणेश जी के सिद्धिविनायक रूप की पूजा व व्रत किया जाता है।