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UP: सुप्रीम कोर्ट से बरी हुआ गंभीर, गांव में इस बात की दहशत...दंपती और चार मासूमों को कुल्हाड़ी से काट दिया था

Mon, 10 Feb 2025 08:57 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

अछनेरा के गांव तुरकिया में गंभीर सिंह ने दोस्त के साथ मिलकर भाई सत्यभान, भाभी पुष्पा और उनके चार बच्चों कन्हैया, आरती, गुड़िया और प्रिया की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। बाद में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गंभीर सिंह को फांसी की सजा हुई थी। सभी को बेहोश करने के बाद गला काटा था।
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तुरकिया हत्याकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आगरा के अछनेरा का गांव तुरकिया...। 10 मई, 2012 की वह सुबह। रात में किसान सत्यभान के परिवार में खूनी खेल खेला गया। सत्यभान, उनकी पत्नी पुष्पा, बच्चों आरती (6), कन्हैया (4), मछला (3) और गुड़िया (2) की हत्या कर दी गई। एक-एक कर सभी को कुल्हाड़ी से काट दिया गया। गांव में लोग घरों में सोकर ही उठे थे कि पूरे परिवार को खत्म करने की खबर ने हिला दिया था।

12 साल पहले हुए हत्याकांड की याद एक बार फिर रविवार को गांव के लोगों में ताजा हो गई। सत्यभान के भाई गंभीर सिंह के सुप्रीम कोर्ट से बरी होने की अमर उजाला में प्रकाशित खबर पढ़ने के बाद बुजुर्ग चर्चा करते रहे। गांव में दोपहर में अमर उजाला टीम के पहुंचने पर लोग घरों से बाहर निकल आए, लेकिन कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं हुआ। हालांकि दबी जुबान में पूरा घटनाक्रम बयां की। सभी को एक ही डर है कि गांव में गंभीर आया तो क्या होगा...

 
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तुरकिया हत्याकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सत्यभान के पड़ोस में रहने वाले परिवार से रिपोर्टर ने बात की। परिवार ने बताया कि जब घटना का पता चला, तब घर में नहीं थे। खेत पर फसल की देखरेख में लगे थे। गांव के लोगों के बताने पर जानकारी हुई। जब तक घटनास्थल पर पहुंचे, तब तक शवों को पुलिस लेकर जा चुकी थी। उन्हें बस इतना पता है कि सत्यभान के परिवार को कुल्हाड़ी से काटकर मारा गया था। हत्याकांड के बाद कई रात सो नहीं सके थे। मृतक सत्यभान के भाई गंभीर पर ही आरोप लगे थे। उसे जिला न्यायालय से दोषी भी साबित करते हुए फांसी की सजा भी हुई थी।

 
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तुरकिया हत्याकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पड़ोस के अन्य परिवार की महिला का कहना था कि 6 लोगों को बेरहमी से मार दिया गया। पुलिस ठीक से विवेचना करती तो हत्याकांड का सही खुलासा हुआ होता। मजबूत साक्ष्य भी मिलते। जल्दबाजी में पूरा घटनाक्रम खोल दिया गया, जिससे पुलिस पर कोई अंगुली नहीं उठाए। जो आरोपी बनाया गया, उसे सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त कर दिया गया। अब असली कातिल काैन है? पुलिस कैसे पता करेगी। इतने साल बाद किसी सुराग का मिलना आसान नहीं है। जेल से रिहा होने के बाद गंभीर वापस आया तो क्या होगा। कई लोगों ने उस समय अपने बयान दिए थे। पुलिस के सामने आकर बोले थे।


 

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तुरकिया हत्याकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेटा हमें नहीं पता, हम क्यों बोलें
गांव वाले डरे हुए हैं। एक महिला ने कहा कि बेटा हमें तो गांव में ही रहना है। किसी के परिवार में क्या हुआ, क्यों बताएं। उन्हें किसी से कोई रंजिश नहीं लेनी है। जिसे जो करना था, वह करके चला गया। अब काैन मुक्त हुआ, उसे जानने से क्या फायदा हो जाएगा। 6 लोगों की जान चली गई। सुनकर ही डर जाते हैं। जिसे पुलिस ने आरोपी ठहराया था, अब वह गांव में आएगा तो कैसे रह पाएगा? यह ही सवाल बना हुआ है।
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तुरकिया हत्याकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रहने तो नहीं आए, पड़ोसी ने घर में भर दिया भूसा
मृतक सत्यभान का घर अब भी वीरान पड़ा हुआ है। 12 साल बाद भी मकान में कोई रहने नहीं आया है। जिन दो कमरों में हत्या हुई थी, उनमें भूसा जरूर भरा हुआ है। मुख्य दरवाजे को बंद कर दिया है। पड़ोसी ने बगल से दरवाजा खोलकर दूसरी तरफ से रास्ता बना लिया है।
 
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