आगरा के ताजगंज श्मशान घाट के विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार के लिए पांच घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। सोमवार की शाम पांच बजे तक करीब 15 शव विद्युत शवदाह गृह के बाहर रखे थे। क्षेत्र बजाजा कमेटी के अनुसार, इनमें ऐसे लोगों के शव भी हैं, जिनकी कोरोना से मौत हुई है। कमेटी ने यहां अपने सदस्यों की संख्या भी बढ़ा दी है। सोमवार को लगभग 35 शवों का दाह संस्कार हुआ।
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ताजगंज श्मशान घाट पर जलतीं चिताएं
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार को दोपहर 12 बजे के बाद यहां हालात बिगड़े। एक के बाद एक शव लाए गए और अंतिम संस्कार के लिए इंतजार का समय बढ़ता गया। परिजन अपने को खोने का दर्द लिए कई घंटे बाहर बैठे रहे। शाम को वहां बाहर शवों की कतार लग गई थी। ठेले पर सामान बेचने वाले सुशील कुमार का कहना था कि वह पिछले 20 साल से यहां ठेला लगाता है लेकिन इतने शव श्मशान घाट पर आते कभी नहीं देखे।
क्षेत्र बजाजा कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सुनील विकल ने बताया कि कमेटी अपने स्तर से पूरी तरह से मुस्तैद है। कोशिश है कि जल्द से जल्द दाह संस्कार हो। इसलिए हमने विद्युत शवदाह गृह पर सदस्यों की संख्या भी बढ़ा दी है।
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ताजगंज श्मशान घाट पर रखा शव
- फोटो : अमर उजाला
आठ अप्रैल के बाद बढ़ी संख्या
विद्युत शवदाह गृह के प्रभारी संजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि सोमवार को लगभग 35 शवों का दाह संस्कार हुआ। शाम 5 बजे लगभग 15 शवों को लेकर परिजन इंतजार में थे। आखिरी शव के परिजनों को दाह संस्कार के लिए करीब 5 घंटे इंतजार करना पड़ा। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 17 शव आ रहे थे। आठ अप्रैल के बाद संख्या बढ़ी है, अब औसतन एक दिन 30-35 शव आ रहे हैं।
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ताजगंज श्मशान घाट पर खड़ीं एंबुलेंस और जमीन पर रखा शव
- फोटो : अमर उजाला
टोकन व्यवस्था पर ही किया जा रहा अंतिम संस्कार
क्षेत्र बजाजा कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सुनील विकल ने बताया कि कमेटी की ओर से टोकन व्यवस्था जारी की गई है। टोकन नंबर दिखाने पर ही मृतक के व्यक्ति को अंतिम संस्कार के लिए बुलाया जा रहा है। विद्युत शवदाह गृह में कर्मचारियों को स्पष्ट कर दिया है कि उसी मृत शरीर का दाह संस्कार किया जाए, जो पहले आया है।
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विद्युत शवदाह गृह पर जलतीं चिताएं
- फोटो : अमर उजाला
चारों भट्ठियां चलाई गईं
श्मशान घाट में विद्युत शवदाह गृह की भट्ठियों में अचानक से काफी भार पड़ गया है। सोमवार को यहां चारों भट्ठियां चलाई गईं। सुनील विकल ने बताया कि रखरखाव के लिए अहमदाबाद से कारीगर आते हैं। संक्रमण के चलते कारीगर आगरा नहीं आ पा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ही कारीगरों से किसी तरह काम कराया जा रहा है। विद्युत शवदाह गृह को सामान्य परिस्थितियों के हिसाब से बनाया गया था। अचानक इस तरह से लोड बढ़ने से भट्ठियों में दिक्कत आ जाती है।
पंचकुइयां कब्रिस्तान में जेसीबी मशीन से खुदवाई गईं कब्रें
- फोटो : अमर उजाला
पंचकुइयां कब्रिस्तान में जेसीबी मशीन ने खोदीं कब्रें
पंचकुइयां स्थित कब्रिस्तान में जेसीबी मशीन से 10 कब्रें खुदवाई गईं। ये कब्रें कोरोना संक्रमण से हुई मौत के बाद यहां पहुंचने वाले शवों के लिए खुदवाई गई हैं। पंचकुइयां कब्रिस्तान कमेटी के सचिव मोहम्मद जहीरउद्दीन बाबर सैफी का कहना है कि हम पूरी तरह से तैयार रहना चाहते हैं। हम नहीं चाहते कि यहां शवों को दफन करने के लिए परिजनों को इंतजार करना पड़ा। उनका कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो फिर से जेसीबी मशीन मंगाकर कब्रों की खुदाई कराई जाएगी। इसमें जिला प्रशासन का सहयोग भी हमें मिल रहा है।