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कोरोना की जंग के सिपाही, बेखौफ निभा रहे चिकित्सक का फर्ज, हौसले को सलाम

Wed, 18 Mar 2020 02:47 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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एसएन मेडिकल कॉलेज, चिकित्सकों की टीम - फोटो : अमर उजाला
सफेद कोट पहने डॉक्टरों को यूं ही धरती का भगवान नहीं मानते, जहां कोरोना वायरस से देश-दुनिया में हाहाकार की स्थिति है, ऐसे में यह दिन-रात इससे जंग में लगे हुए हैं। तकनीकी टीम और नर्सिंग स्टाफ भी इनके मजबूत हाथ बना हुआ है। परिजन चिंतित जरूर हैं, लेकिन वह भी चिकित्सकीय फर्ज को नमन करते हुए हौसला बढ़ा रहे हैं। 
 
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एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा - फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य विभाग, जिला अस्पताल, एसएन मेडिकल कॉलेज का चिकित्सकीय स्टाफ कोरोना वायरस से जंग में लगा हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा खतरा मरीजों के इलाज और सैंपलिंग में लगे स्टाफ का है। यह 12-16 घंटे तक लगातार कार्य कर रहे हैं। खाने-पीने तक की फुरसत नहीं हैं। हाल यह है कि नमूने लेने में लगी टीम अपने परिजनों के फोन तक रिसीव नहीं कर पा रही।
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मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला
एसएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. भूपेंद्र चाहर का कहना है कि जूनियर डॉक्टराें की टीम मुस्तैद है। यह सभी अपने
सीनियराें के निर्देशन में कोरोना वायरस से मुकाबला कर रहे हैं। 

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मेडिसिन विभाग - फोटो : अमर उजाला
तीन चरणों में चल रहा कार्य- पहला: मेडिसिन विभाग की टीम नमूना देने आने वाले लोगों की करती है स्क्रीनिंग। दूसरा: माइक्रोबायलॉजी विभाग की टीम कोरोना वायरस की आशंका पर लेती है नमूने। तीसरा: चतुर्थ श्रेणी कर्मी दिन में तीन बार आइसोलेशन वार्ड का क्लीनिकल वॉश करते हैं।  
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एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला
कार्य की अधिक व्यस्तता से थकान भी है, लेकिन जब हम कहते हैं कि घबराओ नहीं सब ठीक है। इतने भर से सामने वाले की मुस्कराहट देख सब भूल जाते हैं। -डॉ. संजीव चौधरी, माइक्रोबायलॉजिस्ट 

डॉक्टरी का मतलब ही मरीज सेवा है। कोरोना वायरस जैसी महामारी से निपटने के लिए पूरे मन से लगे हुए हैं। परिजनों का चिंतित होना लाजिमी है।  
-डॉ. नेहा के.मणि, माइक्रोबायलॉजिस्ट

डॉक्टरी में अपने मरीज की सबसे पहले चिंता करने का भी सबक सिखाया जाता है। नमूने-इलाज ही नहीं उनकी काउंसलिंग भी कर रहे हैं। -डॉ. वकील अहमद, फिजीशियन

परिजन चिंतित रहते हैं, कई बार फोन पर भी बात नहीं हो पाती है। लेकिन वह अपनी देखभाल और डॉक्टरी का फर्ज निभाने को प्रेरित करते हैं।  
-डॉ. अजय मौर्या, फिजीशियन
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एसएन मेडिकल कालेज - फोटो : अमर उजाला
डर तो लगा लेकिन काम किया
शुरुआत में वायरस का डर लगा, लेकिन सफाई करना मेरा कार्य है। आइसोलेशन वार्ड की पूरी तरह से क्लीनिकल वॉश करती हूं।  -मनोरमा, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी

 आइसोलेशल वार्ड की दीवार, पलंग, शौचालय को पूरी तरह से साफ करते हैं। पहले डर लगा, लेकिन अब सामान्य लगता है। -राजेश कुमार, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी  
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