कोरोना संक्रमण ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। अपनों के खोने का दर्द है तो भविष्य का संकट सामने है। घर का मुखिया खो दिया। पिता के साथ मां की भी बीमारी में मौत हो गई। अब घर में कोई कमाने वाला नहीं है। बूढ़े दादा-दादी सहारा बने हैं। प्राथमिक विद्यालय, गुही, बाह में तैनात शिक्षामित्र टिंकी भदौरिया और उनके पति की मौत के बाद दो बच्चे अनाथ हो गए हैं। इन बच्चों की जिम्मेदारी अब बुजुर्ग दादा-दादी के कंधों पर आ गई है, जिनकी उम्र 70 वर्ष के पार है। इस परिवार को आर्थिक मदद की दरकार है। टिंकी भदौरिया की मौत 10 मई को हुई। वह कोरोना संक्रमित थी, इलाज चल रहा था। उनकी मौत के चार दिन बाद ही पति हरवेंद्र सिंह भदौरिया की मौत हो गई। वह भी कोरोना संक्रमित थे। इनके दो बेटे हैं विदित (12 वर्ष) तथा विराट (10 वर्ष) हैं। दोनों माता-पिता का सिर से उठने से गुमसुम रहने लगे हैं। दादा-दादी का सहारा है।