मुगलों की राजधानी रहे फतेहपुर सीकरी के महल परिसर तक जाने में सड़क के एक ओर मलबा दबा नजर आता है, लेकिन अब ऐसा दृश्य नहीं दिखेगा। आगरा गेट से लेकर नौबतखाना तक यहां मुगल बाजार नजर आएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यहां उत्खनन शुरू किया है, जिसमें मलबे में दबे मुगल बाजार को सामने लाया जाएगा। यहां 24 दुकानें हो सकती हैं। पूर्व में इससे आगे किए गए उत्खनन के दौरान बीते साल 35 दुकानें निकल चुकी हैं, इनमें से 13 दो मंजिला थीं।
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fatehpur sikri
फतेहपुर सीकरी में मुगल काल में आगरा गेट से लेकर टकसाल तक बाजार माना जाता था। कारवां सराय के पास भी बाजार था जो समय के साथ मलबे में दफन हो गए। आगरा गेट से सीकरी के महल तक जाने पर एक ओर पहाड़ी पर मलबा पड़ा हुआ है, जहां एएसआई ने उत्खनन कराया तो दुकानें सामने आ गईं। 22 दुकानें सड़क की तरफ मिलने के साथ 13 दो मंजिला दुकानों के अवशेष मिले हैं।
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excavation at Fatehpur Sikri
- फोटो : अमर उजाला
अब तीसरे चरण में एएसआई यहां 150 मीटर लंबी सड़क के दोनों ओर साइंटिफिक क्लीयरेंस कर रहा है। इसमें 8 महीने लग सकते हैं। इस काम पर 36 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
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फतेहपुर सीकरी के उत्खनन में निकली 12 दुकानों को संरक्षित किया गया
- फोटो : अमर उजाला
6 फुट तक है मलबा, कई दुकानें दो मंजिला
एएसआई ने दो साल पहले फतेहपुर सीकरी में नौबतखाना के पास साइंटिफिक क्लीयरेंस कराया था। तब यहां मुख्य मार्ग पर 22 और अंदर की तरफ द्वार वाली 13 दो मंजिला दुकानें मिली थीं। 2.5 मीटर चौड़ी दुकानों के अवशेष एएसआई ने संरक्षित किए हैं। उत्खनन में ये दुकानें छह फुट मिट्टी में दबी हुई थीं। जो दुकानें मिली हैं, उनका प्रवेश द्वार मुख्य सड़क के आगे नहीं, बल्कि पीछे हैं। पुरातत्वविदों के मुताबिक यह बाजार चौक पैटर्न पर दिखता है, जहां बीच में आंगन के साथ चारों ओर दुकानें हैं।
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एएसआई द्वारा किया गया खोदाई कार्य यहां निकली दुकानें की संरक्षित
- फोटो : अमर उजाला
मुगलकालीन बाजार के समान दिखेगा
सीकरी में साइंटिफिक क्लीयरेंस कर मुगलकालीन बाजार के अवशेष संरक्षित किए हैं। अब नौबतखाना की ओर काम कराया जा रहा है, जहां अवशेष निकलने पर उन्हें संरक्षित किया जाएगा। संरक्षण के बाद यह वैसा ही नजर आएगा, जैसा इतिहास की किताबों में मुगलकालीन बाजार बताया गया है। -वसंत कुमार स्वर्णकार, अधीक्षण पुरातत्वविद
आगरा और सीकरी में थे दो मंजिला बाजार
इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे ने बताया कि मुगल दौर में आगरा और सीकरी में दो मंजिला बाजार थे। इतिहास की किताबों में इनका जिक्र है। आगरा में किनारी बाजार में राजकुमार हाथी पर सवार होकर बाजार जाते थे। वहां दूसरी मंजिल की दुकानों से हाथी पर बैठे हुए खरीदारी करते थे। सीकरी में भी दोमंजिला बाजार थे।