आगरा के दयालबाग में पकड़े गए फर्जी आईआरएस की महिला मित्र को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि महिला ने ही एसएसपी को फोन कर खुद को आईएएस बताया था। फर्जी आईआरएस को पुलिस द्वारा परेशान करने की शिकायत की थी। नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने में भी शामिल रही है। दोनों को सोमवार को जेल भेज दिया गया।
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तस्वीरें: आगरा में पकड़ी गई फर्जी आईएएस और आईआरएस की जोड़ी, कारनामे जानकर पुलिस भी हैरान
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fake IAS officer
- फोटो : अमर उजाला
एसपी सिटी प्रशांत वर्मा ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों में मैनपुरी का मितेश कुमार उर्फ गुड्डू और न्यू आगरा के दयालबाग निवासी उसकी महिला मित्र अंशुल हैं। वजीरपुरा निवासी फैसलउद्दीन ने शिकायत की थी कि उससे नौकरी लगवाने के नाम पर मितेश ने 27 हजार रुपये ले लिए हैं। इस पर मुकदमा दर्ज किया गया। मितेश हाल में नगला पदी में परिवार सहित रहता है। उसके पिता आगरा में पुलिस विभाग से एचसीपी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। मितेश दयालबाग में अपनी मित्र के साथ ही रह रहा था।
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पुलिस रविवार को उसे पकड़ने महिला मित्र के घर पहुंची तो मितेश ने खुद को आईआरएस बताया था। इसके बाद उसकी महिला मित्र ने एसएसपी को फोन मिलाया। उसने कहा कि उसके आईआरएस दोस्त को परेशान किया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि महिला मित्र ने भी खुद को आईएएस बताया। इस पर शक हो गया। मितेश से पूछताछ की। उसके मोबाइल में आईडी कार्ड की फोटो मिली। आईआरएस लिखा था।
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इस बारे में विभागीय अधिकारियों से पूछताछ की। तब हकीकत सामने आ गई। इस पर उसे थाने ले आए। कड़ाई से पूछने पर उसने सच उगल दिया। मितेश के पास से स्विफ्ट कार मिली, जिस पर वो नीली बत्ती लगाकर चलता था। उसने 2017 में दिल्ली में फिल्म स्पेशल 26 की तरह एक कारोबारी के घर में रेड डाली थी। 20 लाख रुपयों की मांग की थी। मगर, लोगों ने उसे साथियों के साथ पकड़ लिया था। उनकी पिटाई लगाई थी। दिल्ली के मालवीय नगर थाना में मुकदमा भी दर्ज हुआ था। उसे जमानत मिल गई थी।
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पुलिस ने सोमवार को मितेश और अंशुल को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस टीम में इंस्पेक्टर अनुज कुमार, एसआई अवनीश कुमार त्यागी, मनेाज कुमार, सिपाही शाकिर हुसैन, सतेंद्र कुमार और उमेश कुमार शामिल थे। पुलिस की पूछताछ में मितेश की मित्र अंशुल ने बताया कि वह सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही थी। तभी उसकी मुलाकात उससे हुई। बाद में दोस्ती हो गई।
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अंशुल के मुताबिक मितेश ने खुद को आईआरएस बताया था। उसे नहीं पता था कि वो फर्जी है। परिजनों को भी उसकी हकीकत नहीं मालूम थी। एसएसपी को फोन भी इसलिए किया था। उसने आईएएस परीक्षा भी पास की थी। इंटरव्यू दिया था। उसका रिजल्ट आने वाला था। पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन चेक किए। इसमें फोटो मिले है, जिनमें अंशुल संघ लोक सेवा आयोग दफ्तर के बाहर खड़ी है। वहीं मितेश भी नीली बत्ती लगी कार के साथ खड़ा है। इसके अलावा आईएएस की मुहर की फोटो हैं।
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जून में थाना न्यू आगरा पुलिस ने फर्जी आईएएस अफसर मंजीत राज को पुलिस ने पकड़ा था। वो सेवानिवृत्त शिक्षाधिकारी की बेटी से मंगनी करने आया था। उसने खुद को पांडिचेरी की उप राज्यपाल का ओएसडी बताया था। शादी में चार करोड़ रुपये खर्च करने की मांग रखी थी। शक होने पर सेवानिवृत्त अधिकारी ने पुलिस की मदद ली। पुलिस ने फर्जी आईएएस के साथ उसके पिता, चाचा और चालक को भी पकड़ा था।