फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जन्मदिन पर युवा इंजीनियर ने की आत्महत्या, फेसबुक पर लिखा, इस साल उदास महसूस कर रहा हूं...

Tue, 04 Feb 2020 10:46 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
1 of 5
शिवम (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
डिफेंस कॉलोनी में इंजीनियर शिवम शर्मा (24) ने शनिवार की रात में घर में ही फंदे पर लटककर जान दे दी। रविवार को उसका जन्मदिन था। परिवार के लोग इसे मनाने की तैयारी कर चुके थे। शिवम ने कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा है। वह अक्सर लोगों से कहता था कि ज्यादा दिन नहीं जीना है। बीटेक के बाद वह घर पर ही एलईडी बल्ब बनाता था।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
घर पर ही एलईडी बल्ब बनाता था शिवम - फोटो : अमर उजाला
शिवम के पिता राजेश बाबू शर्मा नलकूप ऑपरेटर हैं। परिजनों बताया कि शनिवार की शाम खाना खाने के बाद घर की दूसरी मंजिल के कमरे में बल्ब बनाने के लिए वह चला गया था। रविवार सुबह सीढ़ी का गेट बंद मिला। आवाज देने पर भी नहीं खुला, तो छत से कमरे में जाकर देखा गया। यहां पंखे पर शिवम का शव लटका था।
 
विज्ञापन

3 of 5
शिवम (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
सूचना पर पहुंची पुलिस ने बताया कि शिवम ने कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा है। हालांकि आसपास के लोगों का कहना है कि वह मिलनसार था, लेकिन अक्सर उदास रहता था। कई लोगों से उसने कहा था कि जिंदगी बहुत लंबी नहीं है, ज्यादा दिन नहीं जीना है। थाना प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। सुसाइड की कोई वजह अब तक सामने नहीं आई है। इस साल उदास हूं... शिवम ने दो जनवरी को फेसबुक पर आखिरी पोस्ट की थी। इसमें लिखा था, फीलिंग बोरड इन 2020 ( इस साल उदास महसूस कर रहा हूं),  वेटिंग फोर 2021 (अगले वर्ष का इंतजार है)।

4 of 5
सूचना पर पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला
दो महीने पहले शिवम की शादी तय कर दी गई थी, लेकिन उसने इंकार कर दिया था। परिजनों से कहा था कि जब ज्यादा जीना ही नहीं है तो शादी करके क्या करूंगा? किसी की जिंदगी तबाह क्यों करूं? इस पर परिवारीजनों ने उसके छोटे भाई के लिए लग्न चढ़वाई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
शिवम का परिवार - फोटो : अमर उजाला
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. दिनेश राठौर का कहना है कि उदासी एक बीमारी है, जो उपचार न कराए जाने पर गंभीर रूप ले लेती है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उदासी के शिकार इंसान के बारे में अन्य लोग समझते हैं कि उसका स्वभाव ही ऐसा है, जबकि वह पीड़ा से गुजर रहा होता है। इस बीमारी का उपचार संभव है। जिला चिकित्सालयों में परामर्श केंद्र खोले गए हैं। मानसिक  स्वास्थ्य संस्थान में भी इसकी व्यवस्था है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें