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इतिहासः दादा ने बनवाई बाबरी मस्जिद, तो पोते ने चलवाया श्रीराम का सिक्का

Tue, 12 Nov 2019 10:14 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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भगवान श्रीराम का माता सीता के साथ पहला सिक्का - फोटो : अमर उजाला
मुगल वंश की नींव रखने वाले बाबर के पोते और हिंदुस्तान के शहंशाह अकबर ने आगरा के किले से 415 साल पहले राम-सिया पर चांदी का सिक्का जारी कर सुलहकुल की नींव रखी थी। 1604 में आगरा टकसाल से भगवान श्रीराम का माता सीता के चित्र वाला चांदी का सिक्का जारी किया गया, जो पांच अधेला का था। चांदी के इस सिक्के पर फारसी में पीछे की ओर लिखा गया। पढ़िये पूरी रिपोर्ट...
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फतेहपुर सीकरी
मुगल शहंशाह अकबर ने फतेहपुर सीकरी में 1584 में दीन ए इलाही धर्म की शुरूआत की, लेकिन सीकरी से पानी की कमी के कारण अपनी राजधानी वापस आगरा लानी पड़ी। 
 
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आगरा किला - फोटो : अमर उजाला
आगरा के किले से पूरे देश पर मुगलिया सल्तनत चला रहे अकबर ने अंतिम वर्ष 1604 में भगवान राम के प्रति आस्था को देखते हुए सौहार्द की मिसाल पेश की। इतिहासविदों का मानना है कि बीरबल और राजा टोडरमल के प्रभाव के कारण अकबर ने सोने और चांदी के सिक्के जारी किए, जिनमें देवनागरी भाषा में राम-सिया अंकित किया गया।

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1604 में चांदी का सिक्का - फोटो : अमर उजाला
आगरा से फतेहपुर सीकरी राजधानी ले जाने के बाद अकबर ने सीकरी में दीन ए इलाही धर्म की स्थापना की। अपने शासन के अंतिम दौर में 1604-05 के बीच अकबर ने ऐसे कई सिक्के चलाए, जिनमें हिंदू प्रतीक चिह्न उभारे गए थे।
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हाथ में धनुष लिए भगवान श्रीराम का माता सीता के साथ पहला सिक्का - फोटो : अमर उजाला
इनमें राम-सीता के साथ स्वास्तिक, त्रिशूल, गोविंद वाले सिक्के प्रमुख थे। चार ग्राम वजन के ये सिक्के आगरा के साथ सीकरी की टकसाल में भी बनाए गए। जौनपुर और पटना की टकसाल में कम वजन के और आगरा-फतेहपुर सीकरी में ज्यादा वजन यानी 188 ग्रेन वाले सिक्के जारी होते थे।
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