अंतरराज्जीय दवा तस्कर पंकज उर्फ चंद्रकांत गुप्ता न केवल घर में नशे की दवाइयां तैयार कर रहा था बल्कि सरकारी दवाइयों को भी बेच रहा था। वह मध्य प्रदेश के ग्वालियर और भोपाल से सरकारी दवाइयां मंगाता था। सरकारी सिस्टम में उसने सेंध लगा रखी थी। इन दवाइयों की फिर से पैकिंग कर बाजार में सप्लाई करता था। यह जानकारी उसके बेटे अमन गुप्ता से पूछताछ में मिली है।
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नशे की दवाओं के अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
औषधि विभाग ने वाटर वर्क्स से तीन दिन पहले दवाइयों से भरा ऑटो पकड़ा था। इसकी जांच हुई तो पता चला कि ये सरकारी दवाइयां हैं, पैकिंग बदली गई है। पंकज गुप्ता के घर से इन दवाइयों के बिल मिले। मिलान करने पर पता चला कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर और भोपाल के अस्पतालों की दवाइयों की फिर से पैकिंग की गई है।
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पुलिस हिरासत में नशे की दवाओं के तस्कर
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खांसी और बुखार की दवाइयां ज्यादा
जब्त की गई दवाओं 40 बुखार-खांसी की और एंटीबायोटिक हैं। औषधि विभाग इसकी रिपोर्ट बनाकर मध्यप्रदेश सरकार को भेजेगा।
तस्कारों की सरकारी अस्पतालों में भी सेंधमारी
मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों की दवाएं हैं। इनकी पैकिंग बदलकर बाजार में बेचने की आशंका है। इस सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट बनाकर मध्यप्रदेेेश सरकार को विशेष टीम बनाकर जांच कराने की मांग करेंगे। -नरेश मोहन दीपक, औषधि निरीक्षक
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दवाओं की जांच करते एनसीबी अधिकारी
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पंकज ने पांच साल में खड़ा कर लिया नशे की दवाओं का सम्राज्य
तस्कर पंकज के बेटे अमन और भाई सूर्यकांत से पूछताछ में पता चला कि पंकज पांच साल पहले दवा कंपनी के लिए दवा सप्लाई का काम करता था। उसने मेडिकल स्टोर खोला। इसके बाद मानसिक रोग की दवाइयों को नशे के लिए बेचने लगा। पहले वह आगरा गैंग के विक्की अरोड़ा के लिए काम करता था। विक्की अरोेड़ा भी कमला नगर का है। उसने ही आगरा गैंग खड़ा किया जो पंजाब में नशे की दवाएं सप्लाई करता है। इसके बाद पंकज के संबंध प्रमोद जयपुरिया से हो गए। वह अपना अलग गिरोह चलाता है।
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तस्कर के गोदाम से बरामद हुईं दवाइयां
- फोटो : अमर उजाला
तीन साल पहले शुरू की गर्भपात किट की सप्लाई
तीन साल पहले पंकज ने नशे की दवाइयों के साथ गर्भपात किटों की सप्लाई शुरू कर दी। इनकी मांग राजस्थान से आई थी। वहां बड़ी खपत हुई तो कारोबार को फैला लिया। भ्रूण लिंग परीक्षण के रैकेट से मिल गया। इसके बाद हरियाणा भी दवाई भेजने लगा।
तस्करों के गोदामों से बरामद हुईं नशे की दवाइयां
- फोटो : अमर उजाला
औषधि अफसरों के सामने अभी कई चुनौतियां
1. पंकज गुप्ता हाथ नहीं आया है, उससे पूछताछ के बिना उसके राज पूरी तरह से नहीं खुल पाएंगे।
2. बेटे अमन ने बताया है कि पंकज की फैक्टरी भी है लेकिन यह कहां है, पता नहीं चल पाया है।
3. रैकेट में 50 से ज्यादा लोग होने की आशंका है लेकिन नाम सिर्फ 17 के मिल पाए हैं।
4. सरकारी अस्पतालों से दवा चोरी करने वालों की पहचान नहीं हो पाई है।
5. पंकज की गैरहाजिरी में उसका कारोबार एक महिला संभालती है, उसका भी पता नहीं चल पाया है।
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बबलू कुमार, एसएसपी
- फोटो : अमर उजाला
जयपुरिया और आगरा गैंग पर एक साथ कार्रवाई
आगरा। ड्रग विभाग ने इस बार आगरा गैंग और जयपुरिया गैंग पर एक साथ कार्रवाई की है। अंतरराज्यीय तस्कर पंकज गुप्ता का अपना गैंग है। यह भी आगरा गैंग कहलाता है। इसके अलावा आगरा में जयपुरिया गैंग भी नशे की दवाओं की तस्करी करता है। इसका सरगना प्रमोद जयपुरिया उर्फ प्रदीप, उर्फ देवेंद्र उर्फ बुड्ढा है। अभी यह दिल्ली जेल में है। यह भरतपुर राजस्थान का रहने वाला है। इसके खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की ओर से मुकदमा भी लिखाया है। प्रमोद जयपुरिया का जीजा गौरव है, यह तारा मेडिकल स्टोर चलाता है जो भोरे राम मार्केट में है। गौरव अभी फरार चल रहा है। जयपुरिया गैंग का एक सदस्य संजीव गुप्ता आदर्श नगर कॉलोनी से पुलिस के हत्थे चढ़ा है।
तस्करों के गोदामों से बरामद हुईं नशे की दवाइयां
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पंकज गुप्ता के गिरोह के सदस्य तेज नगर निवासी धीरज के घर से सरकारी दवाओं का जखीरा मिला है। ये दिल्ली, मध्य प्रदेश और यूपी के अस्पतालों की दवाएं हैं। 80 फीसदी दवाएं मध्यप्रदेश के अस्पतालों की थी। बाकी के 10 फीसदी दिल्ली और 10 फीसदी ही उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की थी। तस्कर धीरज और मन्नत ने पुलिस को बताया कि कानपुर से हरप्रीत सिंह के यहां से दवाएं आती है। इसे वहीं का निवासी प्रीतम नाथ वाटर वर्क्स चौराहा तक लेकर आता था। वहां से दवाओं को घर तक लाने का काम मन्नत और धीरज संभालते थे। तस्करों ने पत्नी और बच्चों को भी काले कारोबार में लगा दिया है। घर में ही दवाओं के गोदाम बना रखे हैं। इसके गैंग के सदस्य धीरज ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी भी इसमें शामिल हैं। पत्नी ही दवाओं को पंकज गुप्ता के बताए ठिकानों पर पहुंचाती थी। अनिल सिंधी की पत्नी भी गैंग में शामिल है। वह नशे और सरकारी दवाओं को वाटर वर्क्स चौराहा से घर तक लाती थी।