सावन मास के पहले सोमवार पर श्रीकृष्ण मुरारी की नगरी में त्रिपुरारी के जयकारों से गूंज उठी। मथुरा के प्रमुख शिव मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए सुबह ही भक्तों की कतारें लगी गईं। कांवड़ियों ने गंगाजल से शिवजी का अभिषेक किया। शिव भक्तों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।
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चिंताहरण महादेव मंदिर में भक्तों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
एक हाथ में बेलपत्र, रोली-चावल, कलावा, दीप और धतूरा से सजी पूजा की थाली तो दूसरे हाथ में अभिषेक के लिए जल या दुग्ध। सोमवार सुबह से ही मथुरा और वृंदावन के शिव मंदिरों के बाहर आस्था का यह नजारा देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर भगवान भोलेनाथ के जयकारों से गूंज रहे हैं।
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मथुरा के भूतेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा के पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग स्थित भूतेश्वर नाथ महादेव शहर कोतवाल के रूप में विख्यात हैं। यहां सुबह से भी महादेव जी का जलाभिषेक करने वालों की कतार लगी है। अत्यधिक भीड़ के कारण लोगों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
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रंगेश्वर महादेव मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
रंगेश्वर नाथ महादेव मंदिर में केला के पत्तों, झिलमिलाती झालरों से की गई सजावट और सिर पर जटाएं बांधे महादेव जी की झांकी देखते ही बन रही है। वृंदावन के गोपेश्वर मंदिर में दूर दराज इलाके से आए कांवड़ियों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।
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चिंताहरण महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा के गर्तेश्वर, गोकर्णनाथ, पीपलेश्वर, नीलकंठ, गोवर्धन के चक्लेश्वर, नंदगांव के आसेश्वर व नंदीश्वर, वृंदावन के गोपेश्वर महादेव मंदिरों में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। शिवभक्तों ने जलाभिषेक कर बेल पत्र, धतूरे, फल-फूल आदि से भगवान शिव की आराधना की।
साहित्याचार्य शरद चतुर्वेदी के अनुसार श्रावण मास में सोमवार को पूजा अर्चना से प्रसन्न होकर भोलेनाथ धन, यश, विद्या और ऐश्वर्य प्रदान करते हैं। इस मास में दीपदान की विशेष महिमा है। जो लोग शिव मंदिर में दीपदान करते हैं जितने समय तक दीपक शिव मंदिर में जलता है उतने हजार वर्षों तक वो भक्त स्वर्ग में राज्य करता है और शंकर जी का कृपा पात्र बना रहता है।