देवोत्थान एकादशी पर बुधवार को छह शुभ योग बन रहे हैं। इनमें दामिनी योग, सिद्धि योग, महालक्ष्मी योग, शंख योग, मालव्य योग और रवि योग हैं। शादी-विवाह के लिए देवोत्थान का मुहूर्त अनसूझ होता है। इस दिन तुलसी विवाह का अनुष्ठान भी किया जाता है। एकादशी तिथि गुरुवार सुबह तक रहेगी।
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दीयों से जगमग बटेश्वर के घाट
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि इस दिन माता तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम के साथ करने की भी मान्यता है। तुलसी विवाह अनुष्ठान से भी कन्यादान जितना ही पुण्यफल मिलता है। एकादशी तिथि मंगलवार मध्यरात्रि के बाद 2.42 बजे से गुरुवार की सुबह 5.10 बजे तक रहेगी।
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बटेश्वर में यमुना घाट पर भक्तों की भीड़ ( फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
बटेश्वर मंदिर के पुजारी जयप्रकाश गोस्वामी ने बताया कि देवोत्थान एकादशी पर गोकुलनाथ मंदिर में तुलसी शालिग्राम के विवाह के लिए महिलाएं बड़ी संख्या में पहुंचती हैं।
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एकादशी व्रत 2018
पूजा का समय शाम 5:10 से 7:06 बजे तक
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि देवोत्थान एकादशी की पूजा का समय शाम 5:10 से 7:06 बजे तक रहेगा। पुराणों में बताया गया है कि चार माह तक क्षीर सागर में शयन के बाद भगवान विष्णु देवोत्थान एकादशी पर जागते हैं। पूजन के समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय, श्री राधा कृष्णाय नम: का पाठ करना चाहिए। श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करना चाहिए।
शुभ योगों के खास महत्व
सिद्धि योग से सिद्धि प्राप्त होती है। महालक्ष्मी योग से धन और भौंतिक सुख मिलते हैं, शंख योग से विवाह, संतान प्राप्ति होती है, दामिनी योग से चतुर बुद्धि, प्रसिद्धि और विद्या धन प्राप्त होता है, मालव्य योग भौतिक सुख, धन संपदा दिलाता है।