महाशिवरात्रि पर तीर्थनगरी सोरों का पूरा वातावरण भक्तिमय है। चहुंओर श्रद्धा के सैलाब उमड़ रहा है। लहरा गंगाघाट से लेकर शहर की सड़कों तक सिर्फ कांवड़ियों के जत्थे ही नजर आ रहे हैं। कांवड़ियों की कतार एक क्षण भी नहीं टूटी है। तीर्थनगरी और गंगाघाट का नजारा केसरिया हो गया है। रविवार को बरसता आसमान भी जोश और भक्ति का सैलाब नहीं रोक पाया। वहीं भक्तों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से जगह जगह पुलिस बल तैनात किया गया है।
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गंगाघाट पर भक्तों की भीड़
रविवार की सुबह गंगाघाट पर शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर तरफ सिर्फ कांवड़ियां नजर आ रहे थे। कांवड़ियों की जितनी भीड़ गंगा जल लेकर घाट से मुख्य सड़क की ओर आ रही थी। उससे कई गुना ज्यादा भीड़ गंगाघाट की ओर बढ़ रही थी। गंगाजल भरकर कांवड़िया पैदल लौट रहे थे, जबकि आने वाले श्रद्धालु वाहनों से पहुंच रहे थे।
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कांवड़ लेकर गंगाजल लेने जाते कांवड़िये
श्रद्धालुओं की भीड़ इस कदर उमड़ी कि वाहन खड़ा करना तो दूर, घाट तक पहुंचना ही मुश्किल था। श्रद्धालुओं ने गंगाघाट से लगभग सात किमी दूरी पर वाहन खड़े किए। घाट पर जिस तरफ भी नजर गई सिर्फ आस्था में डूबे शिवभक्त नजर आए। घाट के बाद जब शिवभक्तों की भीड़ सड़क पर उमड़ने लगी तो दोपहर बाद भीषण जाम लग गया।
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गंगाघाट पर भक्तों की भीड़
शनिवार रातभर रुक-रुक कर बारिश होती रही, लेकिन शिव की भक्ति पर मौसम की मार का कोई असर नहीं पड़ा। भक्तों का जोश बरकरार रहा। रविवार को भक्ति के आगे आसमान भी झुक गया। दिन में सिर्फ बूंदाबांदी हुई। बम-बम भोले के जयकारों से घाट और तीर्थनगरी ही नहीं बल्कि मुख्य सड़कों के साथ शहर की गलियां और बाजार भी गूंज उठे। बारिश से एक सहूलियत रही कि राह में धूल नहीं उड़ी।
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भीड़ के चलते सोरों में लगा जाम
कांवड़ियों ने तीर्थनगरी सोरों से कांवड़ की साज सज्जा का सामान खरीदा और फिर लहरा गंगाघाट पर गंगाजल भरने से पहले कांवड़ को दुल्हन की तरह सजाकर आकर्षक बना दिया। विधि विधानपूर्वक श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पूजा अर्चना की और गंगाजल लेकर सड़कों की ओर चल पड़े।
गंगाघाट पर पहुंचने वाले श्रद्धालु केसरिया परिधान में थे। इससे तीर्थनगरी केसरिया रंग में रंगी नजर आई। वहीं तरह तरह के रंगों से सजी कांवड़ से सड़कों का नजारा भी सतरंगी हो गया।