देश में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नारे की गूंज है और आगरा में दो बेटियां ही बेटियों को कोख में मारने के गंदे खेल में लिप्त थीं। इनमें से एक आगरा की नामी डाक्टर तो दूसरी उसकी रिसेप्शनिस्ट है। बताया गया है कि महिला के परिवार को गर्भपात के लिए रिसेप्शनिस्ट ही राजी करती थी। ये पूरा खेल कुछ यूं खेला जाता था...
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भ्रूण लिंग परीक्षण
- फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि आगरा के चोपड़ा सुपर स्पेशिएलिटी हास्पिटल से भ्रूण लिंग परीक्षण में गिरफ्तार डा. निर्मल चोपड़ा और उनकी रिसेप्शनिस्ट तनीशा शर्मा भी दो बेटियां ही हैं। यही अन्य महिलाओं के भ्रूण लिंग परीक्षण का काम करती थी। राजस्थान की पीसीपीएनडीटी टीम को पूछताछ में पता चला है कि सोनोग्राफी से भ्रूण का लिंग बताने के लिए डाक्टर निर्मल चोपड़ा 30 हजार रुपये लेती थी।
इनमें से 15 हजार डाक्टर खुद रखती थी और पांच-पांच हजार रिसेप्शनिस्ट और दोनों दलालों को दिए जाते थे। जिस महिला के गर्भ में बेटी होती थी, उससे और उसके परिवार से रिसेप्शनिस्ट तनिशा बात करती थी। उनसे पूछा जाता था कि वह बच्ची को जन्म देना चाहती है या फिर गर्भपात चाहती है। बताया गया है कि ज्यादातर लोग गर्भपात के लिए राजी हो जाते थे। पढ़िए आगे...
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भ्रूण लिंग परीक्षण
- फोटो : अमर उजाला
गर्भपात के लिए राजी होने वाले परिवारों से 20 हजार और ( कुल मिलाकर 50 हजार ) लिए जाते थे। इसके बाद हॉस्पिटल में गर्भपात कर दिया जाता था यानी बेटियों को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता था। ऐसे में राजस्थान की पीसीपीएनडीटी टीम ने इस रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए भी एक प्लान तैयार किया।
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ultrasound
इसके लिए भरतपुर से गर्भवती महिला को लेकर टीम का एक सदस्य आगरा आया। यहां चोपड़ा नर्सिंग होम में तनिशा से मिला। उसने बताया कि 30 हजार रुपये देने होंगे। गर्भवती महिला ने 30 हजार रुपये दे दिए। इसके बाद उसकी सोनोग्राफी कराई गई।
डाक्टर निर्मल चोपड़ा ने जैसे ही भ्रूण का लिंग बताया, वैसे ही उन्हें पकड़ लिया गया। उनके पास से 30 हजार रुपये भी बरामद हो गए। नोटों के नंबर पहले ही नोट कर लिए गए थे। वही नोट मिले।
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