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परंपरा: 800 साल में पहली बार कोरोना ने नहीं जमने दीं आल्ह खंड की चौपालें, पृथ्वीराज चौहान ने जमाया था डेरा

Wed, 29 Jul 2020 12:21 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

पृथ्वीराज चौहान ने बटेश्वर के हनुमान गढ़ी टीले पर जमाया था डेरा
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बटेश्वर के जैन मंदिर में स्थापित हैं मनियादवे की प्रतिमा, आल्हा ऊदल के इष्टदेव हैं भगवान अजितनाथ - फोटो : अमर उजाला
चंद्र वरदाई ने परमाल रासो में लिखा है ‘अल गारन नृप आइयव, जहां बटेश्वर देश ब्रह्मलाल अस्नान करि, करी सप्त दिन सेव’। ये पंक्तियां बटेश्वर में आल्हा ऊदल की वीरगाथा की गवाह हैं। सावन के महीने में यहां के गांवों में आल्ह खंड गूंजता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। कोरोना ने 800 साल में पहली बार इसकी चौपाल जमने नहीं दी है। 

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पृथ्वीराज चौहान ने बटेश्वर के हनुमान गढी टीले पर जमाया था डेरा - फोटो : अमर उजाला
इतिहासकार डॉ. शिव शंकर कटारे कहते हैं कि परमाल रासो की बटेश्वर की विरासत से जुड़ी रचनाएं ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि करती हैं। आल्हा ऊदल की वीरगाथा और आल्ह खंड से जुड़े साक्ष्य बटेश्वर में आज भी मौजूद हैं। 
 
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बटेश्वर की मंदिर श्रृंखला - फोटो : अमर उजाला
सिरसागढ़ में मलिखान पर चढ़ाई के लिए दिल्ली से निकले पृथ्वीराज चौहान ने बटेश्वर के हनुमान गढ़ी टीले पर डेरा डाला था। 800 साल हो गए, सावन के महीने में भदावर क्षेत्र के गांवों में आल्ह खंड की महफिल सजती थी। महामारी कोरोना के कारण इस साल ऐसा नहीं हुआ।

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पृथ्वीराज चौहान ने बटेश्वर के हनुमान गढ़ी टीले पर जमाया था डेरा - फोटो : अमर उजाला
पूर्व जिला पंचायत सदस्य मलखान सिंह राठौर, क्वारी के राजवीर सिंह, पार्वतीपुरा के अजमेर सिंह, बटेश्वर के जयेंद्र वर्मा, जरार के जोधाराम ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि सावन में आल्ह खंड की चौपालें न जमी हों।
 
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शौरीपुर बटेश्वर का जैन मंदिर - फोटो : अमर उजाला
भगवान अजितनाथ हैं आल्हा ऊदल के इष्टदेव
बटेश्वर के प्राचीन जैन मंदिर में भगवान अजितनाथ विराजमान है। भगवान अजितनाथ की पहचान आल्हा ऊदल के इष्टदेव (मनियादेव) के रूप में भी है। बटेश्वर में परमर्दिदेव ने सफेद संगमरमर का मंदिर बनवाया था।
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शौरीपुर बटेश्वर का जैन मंदिर - फोटो : अमर उजाला
आल्हा ऊदल के पिता जस्सराज ने 1176 ई0 में मनियादेव की प्रतिमा बनवाई थी। इसे यहां स्थापित किया गया। शौरीपुर बटेश्वर जैन सिद्ध क्षेत्र तीर्थ के उपमंत्री विनोद जैन कहते हैं कि भगवान अजितनाथ आल्हा ऊदल के इष्टदेव थे। यह प्रतिमा महोबा से बटेश्वर लाई गई थी।
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