आगरा के दयालबाग शिक्षण संस्थान (डीईआई) का 37वां दीक्षांत समारोह शुक्रवार को दीक्षांत सभागार में संपन्न हुआ। वर्ष 2018 में सर्वोत्तम विद्यार्थी चुने जाने पर डी. गुरुप्यारी को फाउंडर्स मेडल दिया गया। सभी स्नातक स्तर की परीक्षाओं में सर्वोच्च स्थान पाने पर चंद्रकांता को और परास्नातक की परीक्षाओं में सर्वोच्च अंक पाने पर इति गोयल को प्रेसीडेंट मेडल मिला। इस दीक्षांत समारोह में छात्राएं छायी रहीं।
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समारोह में 89 छात्र-छात्राओं को डायरेक्टर्स मेडल दिया गया। कुल 3823 छात्र-छात्राओं को वर्ष 2018 में विभिन्न परीक्षाओं में सफलता के लिए उपाधियां दी गईं। 59 विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों में पीएचडी उपाधि से सम्मानित किया गया। निदेशक प्रो. पीके कालरा ने संस्थान की रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्रालय अमरजीत सिन्हा रहे। उन्होंने ग्रामीण विकास, रोजगारपक शिक्षा, कौशल विकास और औपचारिक शिक्षा प्रणाली में डीईआई के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की।
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मुख्य अतिथि ने केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में बताया। कहा कि देश वर्ष 2022 तक गरीबी मुक्त भारत बनाने की दिशा में अग्रसर है। सामाजिक सुरक्षा, तकनीकी विकास, रोजगार व परिवहन के साधनों से गरीबी उन्मूलन व नवीन भारत के निर्माण की परिकल्पना को सार्थक बनाया जा सकता है। समारोह की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष डॉ. प्रेम प्रशांत ने की। संस्थान के शिक्षा परामर्शदाता समिति के अध्यक्ष प्रो. पीएस सत्संगी (गुरु महाराज) और रानी साहिबा भी मौजूद रहे। कुलसचिव प्रो. आनंद मोहन ने पदक पाने विद्यार्थियों के नामों की घोषणा की।
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संस्थान के अध्यक्ष प्रेम प्रशांत ने मुख्य अतिथि अमरजीत सिन्हा को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड भी प्रदान किया। डीईआई का वर्ष 2018 का ‘डिस्टिंगुइस्ट एल्युमिनाई अवार्ड’ प्रो. आनंद श्रीवास्तव को दिया गया। जो कि जर्मनी के एक विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। वह उपस्थित नहीं थे, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कार्यक्रम से जुड़े।
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फाउंडर्स मेडल पाने वाली डी. गुरुप्रिया ने बीकॉम ऑनर्स की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इनके पिता डी. गणेश्वर राव डीईआई में ही मैकेनिकल विभाग में शिक्षक हैं। मां डी. गुरुप्यारी सत्संग सभा में सेवारत हैं। डी. गुरुप्रिया ने दयालबाग के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से पढ़ाई की।
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उन्होंने बताया कि यहां का वातावरण बहुत बढ़िया है। विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जाता है। वह थियेटर अभिनय और तबला वादन में रुचि रखती हैं। एमबीए करके संस्थान में शिक्षक के रूप में सेवाएं देना चाहती हैं। उनका जूनियर्स के लिए संदेश है कि पढ़ाई के समय को गंवाएं नहीं। अपने कर्तव्य का पालन करें, सफलता मिलेगी।
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एक डायरेक्टर्स मेडल के साथ प्रेसीडेंट मेडल पाने वाली चंद्रकांता ने बीए ऑनर्स (संस्कृत) उत्तीर्ण किया है। वह पीएचडी करके शिक्षक बनना चाहती हैं। चंद्रकांता सिकंदरा की रहने वाली हैं। पिता श्याम सिंह मजदूरी करते हैं, वह राजमिस्त्री हैं। मां मायरानी गृहणी हैं। चंद्रकांता के दो बड़े भाई और एक छोटी बहन है। बड़ा भाई निजी कंपनी में नौकरी करता है। बाकी सभी पढ़ रहे हैं।
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माता-पिता बेटों और बेटियों को समान रूप से देखते हैं। शिक्षा पर जोर देते हैं। बेटी की इच्छा माता-पिता का नाम रोशन करना है। चंद्रकांता का कहना है कि वह संस्कृत शिक्षक बनकर विद्यार्थियों में इस विषय के प्रति रुचि पैदा करना चाहती हैं। संस्कृत से बाकी भाषाएं निकली हैं। वेदों में ज्ञान का भंडार है।
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प्रेसीडेंट मेडल के साथ डायरेक्टर्स मेडल अर्जित करने वाली एमएससी मैथ्स उत्तीर्ण इति गोयल प्रोफेसर या फिर आईएएस बनना चाहती हैं। यह मूल निवासी उझानी, बदायूं की हैं। पिता अरविंद कुमार गोयल कारोबारी और मां सीमा गोयल गृहणी हैं। इति का कहना है कि माता-पिता की प्रेरणा से उनको सफलता मिली है। जूनियर्स के लिए संदेश है कि लक्ष्य निर्धारित करके कठिन परिश्रम करें। सफलता मिलेगी।
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कई छात्र-छात्राओं को पदक पाने की आदत बन गई है। एमफिल (राजनीतिशास्त्र) की छात्रा शिवानी सेठ को सातवीं बार डायरेक्टर्स मेडल मिला। वह बेहद खुश थीं। कहा कि मेहनत रंग लाई।
एमफिल (अंग्रेजी) की छात्रा रतिका सिंह को तीसरी बार डायरेक्टर्स मेडल मिला। वह बीए ऑनर्स, एमए में भी मेडल मिला। पिता आरबीएस इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. यतेंद्र पाल सिंह और मां अनीता ठाकुर भी बेटी को तीसरी बार पदक लेते हुए देखने पहुंचे। बीएससी गृह विज्ञान की छात्रा ज्योति कुमारी के हिस्से भी तीन डायरेक्टर्स मेडल आ चुके हैं।