श्रीकृष्ण के ब्रज में होली के रंग बरस रहे हैं। इन रंगों के साथ बरस रहे आनंद में सराबोर होने के लिए कन्हैया के भक्त ब्रज में डेरा डाले हैं। बरसाना, नंदगांव, वृंदावन और मथुरा की होली के बाद शुक्रवार को गोकुल में होली का आनंद बरसा। भक्ति के रंगों में डूबे भक्त आनंदित हुए। बाल गोपाल स्वरूपों ने छड़ी मारकर होली खेली। नंदभवन से बालगोपाल का डोला निकाला गया।
विज्ञापन
2 of 8
ठाकुरजी के डोले को लेकर जाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
कन्हैया के गांव गोकुल में द्वापर की छड़ी मार लीला के दर्शन पाकर भक्त निहाल हो गए। गोकुल की गलियों में सतरंगी छटा बिखरी। गोकुल में छड़ी मार होली को देखने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आए और गोकुल की इस दिव्य होली का आनंद लिया। सबसे पहले कान्हा के बाल स्वरूप को फूलों से सजीधजी पालकी में बैठाकर नंद किला से शोभायात्रा निकाली गई।
विज्ञापन
3 of 8
गोकुल की छड़ी होली के लिए निकला डोला
- फोटो : अमर उजाला
गोकुल में श्रद्धालुओं की भीड़ थी। हर कोई गोकुल की गलियों में बरस रहे रंग में सराबोर होने की चाह लिए पहुंचा। सुबह गोकुल के नंदभवन से बालगोपाल का डोला निकला। मंदिर के पुजारी सहित गोस्वामीजन बाल गोपाल के डोले को अपने कंधों पर लेकर चल रहे थे। गोकुल की गलियों से होकर निकले डोले पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
4 of 8
महिलाओं के हाथों में छड़ी
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर बाद ठाकुरजी का डोला मुरलीधरघाट पर पहुंचा। यहां सोलह शृंगार कर तैयार गोपियां हाथों में छड़ी लेकर बाल रूप कान्हा का इंतजार कर रहीं थीं। कन्हैया के सखा बाल ग्वाल भी अपनी पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे। ठाकुरजी से अनुमति लेने के साथ ही छड़ी मार होली का शुभारंभ हुआ।
विज्ञापन
5 of 8
गोकुल में खेली गई छड़ीमार होली
- फोटो : अमर उजाला
चौक पर बाबा नंद के द्वार मची है होरी.. आदि रसियाओं पर भक्त श्रद्धालुजन खूब नाचे। मुरलीधर घाट पर रसिया कलाकारों ने रसिया गाकर वातावरण को भक्तिमय मना दिया। गोस्वामी समाज द्वारा श्रद्धालुओं पर ठाकुरजी का प्रसादी रंग और गुलाल डाला और छड़ी मार होली खेली गई। रंग के इस आनंद में बाहर आए श्रद्धालु सराबोर हो होली के गीतों पर नाच रहे थे।
विज्ञापन
6 of 8
अपने बाल गोपाल को लेकर आई महिला
- फोटो : अमर उजाला
पूरे बजे में जहां लठामार होली का आयोजन किया जाता है, वहीं गोकुल में बाल गोपाल से लाड़ लड़ाते हुए गोपिकाएं छड़ी मार होली खेलती हैं। वो भी धीरे-धीरे क्यों कि कहीं कान्हा को लग न जाए। इसी प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए शुक्रवार को गोकुल की गलियों में भक्ति भाव के साथ छड़ी मार होली खेली गई। गोकुल की गलियां गुलाल और अबीर से रंगीन हो गईं।
विज्ञापन
7 of 8
होली के रंगों में रंग कर जमकर नाचे श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
बाल गोपाल की शोभायात्रा जहां जहां से निकाली गई, उन गलियों में फूलों की बरसात हुई। गलियों में कतारबद्ध खड़े श्रद्धालु होली के गीतों पर नाचते-गाते हुए चल रहे थे। लाला के डोले पर पुष्प बरसा हो रही थी। हर कोई होली के रंगों में रंगे बाल गोपाल के रूप को देख भावविभोर हो गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
मुरलीधर घाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। वहां तक शोभायात्रा पहुंची तो लोगों ने ढोल-नगाड़ों पर होली गीतों पर जमकर नृत्य किया। हुरियारिनों के हाथों में लाठियां थीं। वह छड़ी मार होली खेलने के लिए जैसे ही मंच से उतरीं तो दर्शक वहां से भाग खड़े हुए। उन्होंने दौड़ा-दौड़ाकर लोगों को प्रेम से लाठियां मारीं।