टीले पे ठकुराइत नाय गई, बहू बेटियन ने कहां रखते। न वहां सोबे की ठौर न, उठवे-बैठवे कूं जगह। जा ते तो हम अपये घर भले। टीलेन पे तो निषाद गए हैं। ये कहना है पुरा भगवान निवासी राम अवतार सिंह का। जो बाढ़ में डूबते गांव में 50 सदस्यों के साथ 98 वर्षीय बीमार पिता की खातिर डटे हुए हैं। आगरा की बाह तहसील का यह गांव चारों तरफ से बाढ़ से घिर गया है। अमर उजाला की टीम बृहस्पतिवार को गांव पहुंची। नाव से गांव में पहुंचे तो पहला घर राम अवतार सिंह का मिला। उनके 95 वर्षीय बीमार पिता निवास सिंह छप्पर में चारपाई पर लेटे थे। चारपाई के पास ही 85 साल की रामरती पंखा झल रही थी। रामरती को आंखों से दिखाई नहीं देता। घर के आंगन में तीन-चार अलग-अलग छप्पर पड़े हैं, जिनमें 20 से 25 पशु बंधे हैं।
निवास सिंह के बड़े पुत्र रामअवतार सिंह की उम्र 70 साल है। उनके दो भाई गोविंद सिंह और सत्यभान सिंह भी अपनी पत्नी व बच्चों के साथ एक ही घर में रहते हैं। राम अवतार से जब पूछा कि सभी लोग सुरक्षित स्थान पर जा रहे हैं तो आप क्यों नहीं गए। उन्होंने कहा, टीलेन पर निषादन के संग और लोग गए हैं। ठकुराइत में ते कोई नाय गयो। हम अपई बहूं बेटियन ने कहां रखते। वहां कोई रैवे की व्यवस्थई नाय...।