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ब्रज में फाग: जब फुलट्टी पर सजता था फूलडोल मेला, जानिए 70 के दशक में कैसी थी होली

Wed, 17 Mar 2021 12:07 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • 30 चौराहों पर चलता था मेला
  • ऐसे नाम पड़ गया फूलडोल मेला
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हैप्पी होली - फोटो : पेक्सेल्स
‘अबे छान-छान, किसी की मत मान, निकल जाएगी जान, तो कौन कहेगा छान’ होली पर यही कहते हुए फुलट्टी चौराहे पर एक तरफ घुटती थी भांग और दूसरी तरफ सड़क पर लगता था मजमा। हाथों में डांडिया, ऊपर से आती गुलाब की पंखुड़ियां, खुशबू से सराबोर चौराहा। इन सबके बीच गूंजते थे होली के लोकगीत। डांडिया रास करते हुए फागुन की मस्ती और रंगों की फुहार से मन में उमंग उठती थी। यह नजारे 1970 के दशक में फु लट्टी की होली के हैं, जब होली पर फूलडोल मेला लगता था। राधाकृष्ण का हिंडोला फुलट्टी से मन:कामेश्वर मंदिर होते हुए पुराने शहर की सड़कों से निकलता था, पर अब फुलट्टी की होली में राधाकृष्ण का हिंडोला तो है, पर वह मस्ती, उमंग और परंपरा नजर नहीं आती।
 
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होली खेलती युवती (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
30 चौराहों पर चलता था मेला
वरिष्ठ अधिवक्ता 75 वर्षीय अचल शर्मा बताते हैं कि 50 साल पहले तक वह फुलट्टी की इस शानदार होली का आनंद लेते रहे, पर अब इसमें केवल औपचारिकताएं हैं। तब होली पर फुलट्टी चौराहे से शुरू होकर फूल डोल का मेला शहर के 30 चौराहों तक चलता था। हर दिन एक चौराहा आगे होकर लगते मेलों के जरिये पूरे फागुन होली की मस्ती शहर की सड़कों पर दिखती थी।
 
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मनकामेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्वालुओं की उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
ऐसे नाम पड़ गया फूलडोल मेला
फुलट्टी के मेले में भगवान कृष्ण की प्रतिमा को फूलों के डोले में लेकर चलते थे और चारों ओर फूलों की पंखुरी ही पंखुरी। यहीं से नाम पड़ गया फूलडोल। पथवारी, बेलनगंज, रावतपाड़ा, मन:कामेश्वर मंदिर होते हुए शहर की सड़कों से तिथि अनुसार फूलडोल निकलता था और पूरे शहर में घूमकर वापस वहीं पहुंचता था। यह निकलता तो अब भी है, लेकिन फुलट्टी तक ही सीमित रह गया। नमक की मंडी, जीवनी मंडी, नाई की मंडी जैसी शहर की इन मंडियों में लगने वाले मेले खत्म हो गए।

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आगरा का घटिया आजम खां मोहल्ला - फोटो : अमर उजाला
कनस्तर पीटकर करते थे मंडलियों का प्रचार
घटिया आजम खां के शिरोमणि सिंह बताते हैं कि होली पर रात में शुरू होकर सुबह 5 बजे तक चलने वाली रास मंडलियों के प्रचार का तरीका भी अनोखा था। कनस्तर पीटकर आवाज लगाई जाती थी कि रात 11 बजे से भिक्की महाराज की मंडली प्रदर्शन करेगी। जहां भी होली का मेला सजता था, वहां पूरा क्षेत्र रोशनी से जगमगा उठता था। एक चौराहे पर मेले के बाद अगले चौराहे वालों को उससे बेहतर मेला लगाने की होड़ रहती थी।
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खाटू श्याम का दरबार। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खाटू श्याम मंदिर में बिखरेंगे होली के रंग 
आगरा जीवनी मंडी स्थित खाटू श्याम मंदिर में 19 से 27 मार्च तक फाल्गुन महोत्सव मनाया जाएगा। इसकी शुरुआत 19 मार्च को मन:कामेश्वर मंदिर से फाल्गुन शोभायात्रा निकालकर की जाएगी। मंदिर परिसर में 27 मार्च तक फूलों, चंदन, लठामार होली का आयोजन किया जाएगा। सोमवार को उत्सव की आमंत्रण पत्रिका का विमोचन किया गया। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अनिल मित्तल ने बताया कि फाल्गुन महोत्सव में प्रतिदिन शाम साढ़े सात से रात्रि नौ बजे तक फूल बंगले का आयोजन होगा। रंग भरनी एकादशी पर 25 मार्च को भजन संध्या होगी। 
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