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हाथों के बल चलकर पूरी की बरसाना परिक्रमा: दादी की अंतिम इच्छा के लिए 7 KM चला आराध्य, लगे राधे-राधे के जयकारे

Fri, 26 Jun 2026 10:21 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

आराध्य ने बताया कि 25 जून को राधारानी के चरणों में समर्पित यह अनोखी परिक्रमा जैसे ही शुरू हुई, गोवर्धन और बरसाना घाटी ''राधे-राधे'' के जयकारों से गूंज उठी। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने उनका हौसला बढ़ाया और आशीर्वाद दिया।
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हाथों के बल परिक्रमा करता आराध्य - फोटो : अमर उजाला
आस्था जब अटूट संकल्प बन जाए, तो असंभव भी संभव हो जाता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया आगरा पश्चिमपुरी (प्रतीक विहार फेज-2) में सालासर बालाजी मंदिर के समीप रहने वाले मात्र 13 वर्ष 5 महीने के मेधावी बालक आराध्य गुप्ता ने। आराध्य ने अपनी दिवंगत दादी की अंतिम इच्छा और आशीर्वाद को समर्पित बरसाना की सात किलोमीटर की परिक्रमा हाथों के बल (अग्र हस्त चालन) चलकर पूरी की। इस अद्भुत दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर श्रद्धालु भावुक हो उठा।
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आराध्य - फोटो : अमर उजाला
योग के 56 आसनों पर है पकड़
फेरी का व्यवसाय करने वाले कमलेश कुमार गुप्ता और मां सीमा गुप्ता के होनहार बेटे आराध्य को बचपन से ही घर में योग का माहौल मिला। माता-पिता की देखरेख में नियमित प्रशिक्षण का नतीजा है कि अब आराध्य और उनकी जुड़वां बहन आराध्या को 56 कठिन योगासनों का गहरा ज्ञान है। सामान्य तौर पर आराध्य एक बार में 50 मीटर तक हाथों के बल चलने में माहिर है, लेकिन बरसाना में उनके संकल्प और आस्था ने उन्हें सात किलोमीटर का लंबा सफर तय करने की शक्ति दी।
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हाथों के बल परिक्रमा करता आराध्य - फोटो : अमर उजाला
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
आराध्य ने बताया कि 25 जून को राधारानी के चरणों में समर्पित यह अनोखी परिक्रमा जैसे ही शुरू हुई, गोवर्धन और बरसाना घाटी ''राधे-राधे'' के जयकारों से गूंज उठी। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने उनका हौसला बढ़ाया और आशीर्वाद दिया। वहीं इस हैरतअंगेज सफर के वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं और लोग आराध्य के जज्बे की चर्चा कर रहे हैं।
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हाथों के बल परिक्रमा करता आराध्य - फोटो : अमर उजाला
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड पर है नजर
आराध्य का कहना है कि उनका लक्ष्य अब इस ऐतिहासिक उपलब्धि को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराना है। यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं बल्कि उनकी दिवंगत दादी का सपना और माता-पिता के संघर्ष का सम्मान है। वह अपने जज्बे, अनुशासन, योग से मिली सकारात्मकता को जीवनशैली में अपनाने की प्रेरणा दूसरों को भी दे रहे हैं।
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