आगरा में डिग्री के लिए बीएड के छात्रों ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में जमकर हंगामा किया। कुलपति की कार के आगे विद्यार्थी लेट गए। सुरक्षा गार्ड ने इनको हटाया। छात्रों ने सुरक्षा गार्ड पर अभद्रता का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर पुलिस आई। डिग्री न मिलने तक छात्र रात तक सर्दी में डटे रहे।
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- फोटो : अमर उजाला
बीएड 2011-12 और 2012-13 के छात्रों को डिग्री नहीं मिली है। 30 जनवरी को सहायक अध्यापक भर्ती के लिए काउंसलिंग होने के चलते गुरुवार की दोपहर सैकड़ों छात्र विश्वविद्यालय पहुंचे। यहां कुलसचिव और कुलपति अपने कार्यालय में नहीं मिले तो छात्र कुलपति सचिवालय के बाहर धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की।
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प्रोक्टोरियल बोर्ड के डॉ. राजेश कुशवाहा छात्रों को समझाने पहुंचे और उनसे कहा कि छात्रों का सत्यापन कार्य चल रहा है, पात्र छात्रों को डिग्री जल्द मिल जाएगी। इस पर छात्रों ने स्पष्ट कहा कि उनके पास सभी प्रमाण पत्र हैं, बिना डिग्री के वापस नहीं जाएंगे। कुलपति को बुलाने पर अड़ गए। शाम को कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित आए और छात्रों से बात की।
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कुलपति ने कोर्ट में मामला चलने की बात कहते हुए फरवरी में प्रोविजनल डिग्री दिलाने को कहा। छात्रों ने तर्क दिया कि इससे वह सहायक अध्यापक की काउंसलिंग में शामिल नहीं हो पाएंगे। ऐसे में बात नहीं बनी और हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस भी पहुंच गई और छात्रों को समझाने लगी। देर शाम जब कुलपति आफिस से जाने लगे तो छात्र उनकी कार के आगे लेट गए। इस पर सुरक्षा गार्ड ने विद्यार्थियों को जबरन हटाया। छात्रों का आरोप है कि इस दौरान सुरक्षा गार्ड ने विद्यार्थियों के साथ अभद्रता की। छात्र रात भर सर्दी में विश्वविद्यालय में डटे हुए हैं।
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कुलपति डॉ अरविंद दीक्षित ने बताया कि दोनों सत्रों का मामला कोर्ट में चल रहा है। 29 जनवरी को कोर्ट में तारीख है। सत्यापन चल रहा है। छात्रों को फरवरी के पहले सप्ताह में प्रोविजनल डिग्री देने को आश्वासन दिया है, लेकिन कुछ अराजक तत्वों के कहने पर छात्रों ने हंगामा किया। इनके साथ सुरक्षागार्ड की ओर से अभद्रता पूरी तरह से निराधार है।
औरेया से आए छात्र अमित यादव ने कहा कि 69 हजार शिक्षकों की जगह निकली है, 30 को काउंसलिंग होनी है। डिग्री नहीं है फिर कैसे इसमें शामिल होंगे। फिर भला इस मार्कशीट का क्या फायदा है। श्वेता उप्रेती ने बताया कि पांच साल से डिग्री के लिए चक्कर काट रहे हैं। हर बार विश्वविद्यालय के अधिकारी आश्वासन देकर छात्रों को लौटा देते हैं। हमारी कोई सुनवाई नहीं कर रहा।