आगरा में हाथी घाट से एत्माद्दौला को जोड़ने वाले आंबेडकर पुल में दरार आ गई है जबकि इस पर रोजाना लगभग 15 हजार वाहन दौड़ रहे हैं। इसका आरसीसी का लिंटर खुल गया है। दो एक्सपेंशन ज्वाइंट जर्जर हो गए हैं। यमुना पर स्थित 650 मीटर लंबे इस पुल का शिलान्यास नौ अक्टूबर 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने किया था। करीब 30 करोड़ की लागत से राज्य सेतु निगम ने इसे तैयार किया। 2010 में पुल आम लोगों की आवाजाही के लिए खोला गया।
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आरसीसी लिंटर से निकली सरिया
- फोटो : अमर उजाला
इस पुल का निर्माण हल्के वाहनों की आवाजाही और वॉटरवर्क्स पर लगने वाले जाम से निजात के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में हुआ था। लेकिन यमुना ब्रिज स्थित रेलवे गोदाम से इस पुल पर होकर हर दिन एक हजार टन से अधिक सीमेंट की ढुलाई हो रही है। ट्रक, ट्रैक्टर व अन्य भारी वाहनों के दवाब से पुल की एप्रोच बिगड़ गई है। यमुना किनारा होकर ताजमहल, आगरा किला, ग्वालियर रोड के पर्यटक अंबेडकर पुल पर होकर यमुना एक्सप्रेसवे, टूंडला, एत्माद्दौला, रामबाग और महताब बाग के लिए जाते हैं।
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आंबेडकर पुल के लिंटर से निकलता लोहे का एंगल
- फोटो : अमर उजाला
2010 से पिछले दस साल में 18 बार इस पुल की मरम्मत हो चुकी है। करीब 1.50 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी पुल से खतरा टला नहीं है। नदी में बने 18 पिलर पर खड़े पुल में 22 एक्सपेंशन ज्वाइंट हैं। इनमें पांच ज्वाइंट में गैप आ गया है। दो ज्वाइंट बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने से आरसीसी लिंटर खुल गया है। जिन हिस्सों की मरम्मत की गई, वहां अब लिंटर से सरिया झांक रहे हैं। आखिरी बार चार साल पहले पुल क्षतिग्रस्त होने पर मरम्मत के लिए इसे दस दिन बंद रखा गया था। करीब 30 लाख रुपये मरम्मत पर खर्च हुए थे।
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जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह
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मरम्मत का आदेश दिया
पुल क्षतिग्रस्त कैसे हुआ इसकी जांच कराई जाएगी। सेतु निगम अधिकारियों को तत्काल मरम्मत का आदेश दिया है। - प्रभु एन सिंह, डीएम
आरसीसी का लिंटर खुला, दो एक्सपेंशन ज्वाइंट हुए जर्जर
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दो माह से क्षतिग्रस्त है... लॉकडाउन के कारण मरम्मत नहीं हुई सवाल : बार-बार एक्सपेंशन ज्वाइंट क्यों क्षतिग्रस्त हो रहे हैं जवाब : पुल हल्के वाहनों के लिए डिजाइन किया था, यह भारी वाहनों के दवाब से क्षतिग्रस्त होता है। सवाल : कब से पुल क्षतिग्रस्त है, आपने क्यों जांच नहीं की। जवाब : दो माह से पुल क्षतिग्रस्त है, अब गैप बढ़ गया है। लॉकडाउन में मरम्मत नहीं हो सकी। सवाल : सड़क में दरारें आ गई हैं, यह कितना खतरनाक है ? जवाब : भारी वाहनों के लिए खतरा है। दरार नहीं आई। सीमेंट उखड़ा है। दोबारा मरम्मत होगी। - विक्रम सिंह, परियोजना प्रबंधक, उ.प्र. राज्य सेतु निगम