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अक्षय तृतीया: भक्त नहीं कर सकेंगे बिहारीजी के चरणों के दर्शन, साल में एक बार मिलता है 'सौभाग्य'

Tue, 11 May 2021 12:15 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन

सार

श्रीबांकेबिहारी मंदिर की परंपरा के अनुसार प्रत्येक अक्षय तृतीया के दिन भक्त ठाकुरजी के चरणों के दर्शन करते हैं। लेकिन यह लगातार दूसरी बार ऐसा होने जा रहा है जब आम भक्त बिहारीजी के चरणों के दर्शन से वंचित रहेंगे। 
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बांकेबिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमण के इस दौर में कोरोना कर्फ्यू के चलते अक्षय तृतीया को एक बार फिर भक्त श्रीबांकेबिहारीजी के चरणों के दर्शन नहीं कर सकेंगे। वर्ष में सिर्फ एक बार बिहारीजी भक्तों को चरणों के दर्शन देते हैं, लेकिन कोरोना कर्फ्यू में मंदिर के दर्शन आम भक्तों के लिए फिलहाल बंद हैं। श्रीबांकेबिहारी मंदिर की परंपरा के अनुसार प्रत्येक अक्षय तृतीया के दिन भक्त ठाकुरजी के चरणों के दर्शन करते हैं। लेकिन यह लगातार दूसरी बार ऐसा होने जा रहा है जब आम भक्त बिहारीजी के चरणों के दर्शन से वंचित रहेंगे। इस बार 14 मई को अक्षय तृतीया है। प्रदेश सरकार ने 17 मई तक कोरोना कर्फ्यू घोषित कर दिया है। कोरोना कर्फ्यू नियमों के तहत मंदिर प्रबंधन ने आम भक्तों के लिए दर्शन प्रतिबंधित कर दिए हैं। इस दौरान सिर्फ सेवा पूजा हो रही है। ऐसे में अक्षय तृतीया को चरणों के दर्शन की परंपरा सिर्फ सेवा पूजा तक सीमित रहेगी।
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बांकेबिहारी मंदिर में भक्त फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
श्रीबांकेबिहारी मंदिर के प्रबंधक मुनीश कुमार शर्मा का कहना है कि आम भक्त चरणों के दर्शन नहीं कर सकेंगे। सेवायत परंपरानुसार ठाकुर जी की सेवा करेंगे। दरअसल, चंदन का लेप केवल ठाकुरजी को गर्मी से बचाने के लिए होता है। सतुआ के लड्डू, खरबूज और तरबूज का भोग लगाया जाता है। साथ ही चंदन का गोला प्रदान किया जाता है। इस दिन बांकेबिहारीजी को धोती (अचला) धारण कराया जाता है। 

 
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ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन के लिए आए भक्त फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन का सबसे बड़ा पर्व है अक्षय तृतीया 
वृंदावन का सबसे बड़ा पर्व अक्षय तृतीया है। इस दिन स्नान और पुण्य का महत्व हैं। ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए भक्त शीतल पदार्थ प्रदान करता है। साल में एक बार चरणों के दर्शन के लिए वृंदावन में ऐसी भीड़ उमड़ती है कि व्यवस्थाएं संभाले नहीं संभलती। अबकी बार लॉकडाउन के कारण भक्त अपने आराध्य के चरण दर्शन नहीं कर सकेंगे। 

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श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर मथुरा - फोटो : अमर उजाला
मथुरा में कोरोना के बढ़ते प्रकोप व राज्य सरकार द्वारा बरती जा रही गंभीरता के दृष्टिगत श्रीकृष्ण-जन्मस्थान के दर्शन आम भक्तों के 24 मई तक के लिए बंद रहेंगे। श्री कृष्ण जन्म स्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि पहले मंदिर को 9 मई तक बंद करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन जनपद में कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस प्रतिबंध की अवधि को बढ़ाकर 24 मई कर दिया गया है। कपिल शर्मा ने भक्तों से व्यापक जनहित में लॉक डाउन सम्बन्धी निर्देशों का अनुपालन करने व कोरोना का टीका लगवाने का आग्रह किया है। वहीं 20 मई तक ठाकुर द्वारिकाधीश मंदिर के पट आम भक्तों के लिए बंद रखे गए हैं। मंदिर के सेवायत पूजा अर्चना करते रहेंगे। प्राचीन केशवदेव मंदिर को भी 21 मई तक बंद रखने पर सहमति बन गई है। यहां ठाकुरजी की सेवा अंदर ही चलती रहेगी। गौरतलब है कि विगत वर्ष भी लॉकडाउन में कई महीनों तक मथुरा में मंदिरों के पट बंद रहे थे।
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द्वारिकाधीश मंदिर - फोटो : अमर उजाला
20 मई तक बंद रहेगा द्वारिकाधीश मंदिर, अंदर चलती रहेंगी सेवा 
पुष्टिमार्गीय संप्रदाय का ठाकुर द्वारिकाधीश मंदिर अभी आम भक्तों के लिए नहीं खुलेगा। कोरोना संक्रमण को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने बाहरी भक्तों के लिए 20 मई तक मंदिर के दर्शन बंद रखने का निर्णय लिया है। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि मंदिर के गोस्वामी बृजेश कुमार महाराज के आदेशानुसार और कांकरोली युवराज गोस्वामी डॉ. वागीश कुमार महाराज के निर्देशानुसार प्रदेश सरकार की गाइडलाइन व मथुरा जनपद में निरंतर बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों की संख्या को देखते हुए अभी 20 मई तक भक्तों के लिए दर्शन न खोलने का निर्णय लिया गया है। ठाकुरजी की सेवा अंदर ही अंदर चलती रहेगी। 
 
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