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कुदरत का कहरः तूफान का एक झोंका आया और इनकी उजाड़ गया दुनिया, पढ़ें ऐसी दर्द भरी दास्तां

Fri, 04 May 2018 02:27 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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तूफान से तबाही - फोटो : अमर उजाला
तूफान ने एक बार फिर जिले में कहर बरपाया। 50 हंसती-खेलती जिंदगियां मौत के मुंह में समा गईं। जिंदगी बचाने को जहां छुपे, मौत बनकर तूफान ने वहीं झपट्टा मारा। तूफान ने आगरा के खेरागढ़ में सबसे अधिक नुकास पहुंचाया। यहां तीन परिवारों की दर्द की दास्ता जानकार आपका कलेजा कांप उठेगा। 
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तूफान से तबाही - फोटो : अमर उजाला
खेरागढ़ के कुकावर गांव निवासी राजवीर और प्रेमपाल के परिजन बुधवार रात आठ बजे खाना खाने के बाद सोने के लिए छत पर चले गए थे। अचानक आए तूफान से टीनशेड को बचाने के लिए राजवीर और प्रेमपाल के साथ अन्य परिजन टीनशेड को बचाने में जुट गए।हवा के साथ टीनशेड उड़ न जाए।
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तूफान से तबाही - फोटो : अमर उजाला
इसलिए वे इसे पकड़े खड़े रहे। तभी एक झोंका आया और वे जिस छत पर खड़े थे, वह भरभरा कर ढह गई। इसमें राजवीर के बेटे संतोष (10) भोला (8) और प्रेमपाल के पुत्री तनु (6 साल) और अदन्ति (एक साल) की मौत हो गई। अन्य घायल हो गए। खेरागढ़ के ही बुरेहरा गांव में सुरेंद्र सिंह और ध्रुव सिंह का गांव के बीचोंबीच दो कमरों का छोटा सा मकान है।

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तूफान से तबाही - फोटो : अमर उजाला
जब तक तूफान नहीं आया तब तक ध्रुव सिंह और सुरेंद्र सिंह का परिवार अपने-अपने कमरे में था। मगर, जैसे ही तूफान आया तो सभी परिजन सुरक्षित ठिकाने को देखते हुए एक ही कमरे में आ गए। तूफान में कमरे की छत ढह गई। पूरा परिवार मलबे में दब गया। इसमें ध्रुव सिंह का छह साल का बेटा देव और सुरेंद्र सिंह का आठ साल के बेटे विवेक की मौत हो गई। बाद से ग्रामीण दहशत में हैं।
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तूफान से तबाही - फोटो : अमर उजाला
दो दिन पहले जिस घर से ढोली उठी थी, तूफान के कहर से उसी घर से गुरुवार को अर्थी उठी। बहन की शादी की खुशियों के बीच भाई दुनिया छोड़कर चला गया। शहनाइयों की गूंज के बाद घर में करुण क्रंदन गुंज रहा था। बूढ़े पिता के कलेजे पर पहाड़ टूट पड़ा था। तूफान का यह वज्रपात खेरागढ़ के महुआखेड़ा निवासी रामभरोसी के घर पर टूटा। बुधवार की रात तूफान आने से पहले 25 वर्षीय बेटा सुनील अपने ममेरे भाई 24 वर्षीय गौतम के साथ कमरे में सोने चला गया था। 
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तूफान से तबाही - फोटो : अमर उजाला
सुनील की पत्नी अपने चार महीने के बच्चे और अन्य परिजनों के साथ दूसरे कमरे में थी। तभी तूफान ने जोर पकड़ लिया। किसी को अंदेशा नहीं था कि जिस कमरे में सुनील और गौतम सो रहे हैं, उसकी छत कमजोर है। देखने से ऐसा लग भी नहीं रहा था। एक मई को सुनील की बहन गुंजन की शादी थी। उसको विदा करने के बाद हारे-थके परिजन आराम की मुद्रा में थे। तभी आसमान में बिजली कौंधी और तूफान के साथ सुनील और गौतम के कमरे की छत आ गिरी। दोनों की मौत हो गई। 
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