आंखों में चमक, होठों पर हंसी, चेहरे पर वतन वापसी की खुशी। घर पहुंची तो पहले मां ने द्वार पर आरती उतारी। फिर पिता ने मिठाइयां बांटी। ये नजारा था रविवार को आगरा के दयालबाग स्थित राहुल विहार में। जहां यूक्रेन से लौटी बेटी साक्षी को देख एक तरफ माता-पिता फूले नहीं समा रहे थे, तो पड़ोसी भी साक्षी को दुआएं देते नजर आए।
यूक्रेन में फंसी साक्षी पहली छात्रा है जो आगरा लौटी है। यूक्रेन के उजरेत शहर में स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा 20 वर्षीय साक्षी ने अमर उजाला को बताया कि भारतीय होने के क्या मायने हैं ये मुझे यूक्रेन में पता चला। जहां तिरंगा हमारी ढाल बना। मैंने राष्ट्रीय ध्वज का वास्तविक महत्व समझा। जितना सम्मान भारतीय होने पर यहां नहीं मिलता उससे अधिक मुझे युद्धग्रस्त यूक्रेन में महसूस हुआ। जब भारतीय होने के कारण हमें विशेष महत्व मिला।