पिता ने कहा, इंसाफ के लिए लड़ते रहेंगे लड़ाई
छात्रा के पिता इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। वह केस की पैरवी के लिए लगातार आ रहे हैं। उन्होंने फोन पर वार्ता में बताया कि अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी पड़ती है। आरोपी पक्ष बचने के लिए तरह-तरह के अथकंडे अपनाते हैं। कई बार सामाजिक और मानसिक दबाव भी झेलना पड़ा। इसके बावजूद पीछे नहीं हटेंगे। हमें न्याय चाहिए। फिर चाहे इसके लिए कितनी ही लंबी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़ जाए।
घटनाक्रम एक नजर में
- 15 मार्च 2013 : दयालबाग शिक्षण संस्थान में शोध छात्रा की हत्या।
- 17 मार्च 2013 : पुलिस ने संस्थान की लैब के पास से लैपटॉप बरामद किया।
- 18 मार्च : छात्रा का मोबाइल संस्थान में ही एक स्थान पर पड़ा मिला।
- 22 अप्रैल : पुलिस ने हत्याकांड के मामले में उदय स्वरूप और यशवीर संधू को जेल भेजा।
- 16 जुलाई : पुलिस ने विवेचना पूरी की। आरोपपत्र को सीओ कार्यालय भेजा।
- 18 जुलाई : आरोपपत्र कोर्ट में पेश किया। इसमें उदय स्वरूप और यशवीर संधू को आरोपी बनाया। हत्या और दुष्कर्म के प्रयास की धारा लगीं।
- 22 जुलाई : प्रदेश सरकार ने केस सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया।
- 10 फरवरी 2014 : उदय स्वरूप और यशवीर संधू को हाईकोर्ट से जमानत मिली।
- पांच जनवरी 2016 : सीबीआई ने कोर्ट में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। सीबीआई ने पुलिस की ओर से लगाई गई दुष्कर्म के प्रयास की धारा को हटाया। आरोपपत्र में दुष्कर्म, हत्या और साक्ष्य मिटाने में लगाया गया। इसमें उदय स्वरूप पर आरोप तय किए गए, जबकि यशवीर संधू को क्लीन चिट दी गई।
सबसे अहम साक्ष्य डीएनए परीक्षण रिपोर्ट बनी
सीबीआई ने 64 गवाह बनाए। साक्ष्य भी जुटाए हैं। इसमें सबसे अहम साक्ष्य डीएनए परीक्षण रिपोर्ट रही। दुष्कर्म की आशंका के चलते स्लाइड बनाई गई थी। इससे डीएनए सैंपल लिया गया था। इसका मिलान उदय स्वरूप के डीएनए से कराया गया था। दुष्कर्म की पुष्टि होने पर सीबीआई ने दुष्कर्म की धारा बढ़ाई थी। इस पर कोर्ट ने आरोपी उदय स्वरूप को दोबारा जेल भेज दिया था।