आगरा की उटंगन नदी में डूबे सात लोगों की तलाश में 400 ग्रामीण और 100 जवान जुटे हैं। उटंगन पर बांध बना दिया है। नदी का बहाव रोका गया है, नाला बनाकर धारा बदल दी है। 250 मीटर के क्षेत्र में पानी कम किया जा रहा है। मिट्टी से भरे बैग लगाए गए हैं। बैरिकेडिंग की तैयारी की जा रही है।
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नदी में डूबे लोगों की तलाश जारी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आगरा की उटंगन नदी में डूबे सात लोगों को निकालने के लिए पुलिस प्रशासन ने सर्च ऑपरेशन वृहद स्तर पर शुरू कर दिया है। नदी में राजस्थान की तरफ से आ रहे बहाव को रोकने के लिए शनिवार को अस्थायी बांध बनाया गया।
वहीं, इस पानी को डूब क्षेत्र से 10 फीट का नाला बनाकर निकाला जा रहा है जबकि खेरागढ़ की तरफ 250 मीटर की दूरी पर नदी में बैरिकेडिंग लगाकर पानी को रोका जाएगा। इसके बाद पानी निकालकर युवकों को तलाशने की योजना अधिकारियों ने बनाई है। हालांकि देर रात तक कार्य चल रहा था।
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आगरा की उटंगन नदी पर बांध बनाते ग्रामीण
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अस्थायी बांध बनाने के लिए कुसियापुर, डूंगरवाला, कैथोली, लालपुर, नगला उदइया, खानपुर, लखनपुरा, कुकुंडई, महमदगढ़, रसूलपुर, चित्रवाला सहित अन्य गांव के 400 से अधिक ग्रामीणों को लगाया गया था। सुबह नौ बजे से ही गांव कुसियापुर के नदी किनारे स्थित श्मशान घाट की तरफ से मिट्टी खोदकर प्लास्टिक के कट्टों में भरी गई।
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आगरा की उटंगन नदी के पानी की धारा बदलने के लिए नाला बनाते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इन कट्टों को ग्रामीणों ने पानी में डालकर बांध बनाया। यह काम शाम तकरीबन 4 बजे तक चलता रहा। बांध बनने से राजस्थान की तरफ से आ रहे पानी के बहाव को रोक दिया गया। उधर दूसरी तरफ डूब क्षेत्र में 10 फीट चौड़ा और 10 फीट गहराई का नाला बनाने का काम शुरू कराया गया। इसके लिए 7 बुलडोजर लगाए गए थे। तेज गति से चले कार्य से शाम 5 बजे तक नाला बनकर तैयार हो गया।
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आगरा की उटंगन नदी पर बांध बनाते ग्रामीण
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद 250 मीटर की दूरी पर पानी निकाले जाने काम शुरू किया गया। खेरागढ़ की तरफ से पानी को रोकने के लिए मेट्रो की बैरिकेडिंग मंगवाई गई थी। हालांकि देर रात तक इन्हें नहीं लगाया गया। इसके साथ ही पानी के पंप, नगर निगम के 12 टैंकरों को पानी भरने के लिए मंगवाया था।
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नदी में डूबे लोगों की तलाश जारी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कैसे क्या हुआ
बांध बनाया
गांव के पप्पू ने बताया कि पानी में पहले मिट्टी भरकर प्लास्टिक के बैगों में रखा गया। इस कार्य में 400 ग्रामीण लगे थे। दो फीट चौड़ाई और पांच से सात फीट तक गहरा रोका लगाया गया।
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आगरा की उटंगन नदी पर बांध बनाने के लिए पानी रोकती जेसीबी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खुदाई में सात बुलडोजर
नदी के एक तरफ नाले की खुदाई के लिए सात बुलडोजर लगाए गए थे। इनसे लगातार आठ घंटे तक खुदाई का कार्य कराया गया। शाम 5 बजे नाला बनकर तैयार हो गया। इससे पानी निकाला जाने लगा। राजस्थान की तरफ से नदी में घटनास्थल की तरफ बहाव रुक गया।
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आगरा की उटंगन नदी पर डूबे लोगों की तलाश
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बैरिकेडिंग लगाएंगे
नदी के दूसरी तरफ बैरिकेडिंग लगाने के लिए मेट्रो के अधिकारियों से बात की गई। रात तक बैरिकेडिंग मंगाई जा रही थी। हालांकि पहुंची नहीं थी। इन बैरिकेडिंग को दूसरी तरफ से पानी को रोका जाना था। जिससे घटनास्थल पर पानी कम हो जाए।
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आगरा की उटंगन नदी पर डूबे लोगों की तलाश जारी, इंतजार करते ग्रामीण
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पंप और टैंकर
शाम को नगर निगम के 12 टैंकर को मंगवा लिया गया। पंपों की मदद से टैंकरों में पानी भरने का काम किया जाना था। वहीं घटना स्थल पर एनडीआरएफ की अलग-अलग टीम ग्रुप में तलाश में लगी हुई थी। हालांकि पानी कम होने की वजह से तैरने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
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आगरा की उटंगन नदी पर डूबे लोगों की तलाश जारी, विलाप करती महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जिस स्थान पर डूबने की घटना हुई है, वहां पर पानी को कम करने के लिए अस्थायी बांध बनाया गया है। पानी को बाइपास करके निकाला जा रहा है। पानी कम होने पर पंप से निकाला जाएगा। इसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू कराएंगे।- राम बदन सिंह, अपर पुलिस आयुक्त
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नदी में डूबे लोगों की तलाश जारी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पानी ने उछाला और भाई ने पकड़ा हाथ
दशहरा के दिन मूर्ति विसर्जन के दाैरान उटंगन नदी में डूबे गांव कुसियापुर के 13 लोगों में से विष्णु को ग्रामीणों को उसी दिन बचा लिया था। हालत गंभीर होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को खेरागढ़ के एक अस्पताल में भर्ती विष्णु ने दर्दनाक हादसे के बारे में बताया। उनका कहना है कि जैसे ही वह नदी में माैजूद गड्ढे में गिरे तो पानी ने उछाल दिया और पीछे आ रहे भाई ने उनका हाथ पकड़ लिया। इसके बाद एक अन्य ग्रामीण की मदद से बाहर निकाला गया।
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नदी में डूबे लोगों की तलाश जारी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कम था नदी का जलस्तर
विष्णु ने बताया कि मूर्ति विसर्जन के दाैरान जब सब लोग नदी में उतरे तो जलस्तर काफी कम था। नदी का पानी लोगों की कमर तक आ रहा था। इसीलिए सभी आगे बढ़ते गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि नदी में गहरा गड्ढा भी है। अचानक से एक व्यक्ति का गड्ढे में गिर गया। उसे बचाने के लिए सभी लोग गिरते चले गए। वह पीछे थे। गड्ढे में गिरते ही पानी ने उछाल दिया, पीछे आ रहे भाई ने हाथ पकड़ लिया। इसके बाद एक अन्य ग्रामीण की मदद से उन्हें बाहर लाया गया।
नदी में डूबे लोगों की तलाश जारी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस जगह पहले कभी नहीं किया था विसर्जन
विष्णु का कहना है कि जहां ग्रामीण गए थे, वहां पहले कभी मूर्ति विसर्जन नहीं हुआ था। पुलिस का भी इंतजाम नहीं था। उटंगन बरसाती नदी है, बारिश के बाद वह सूख जाती है। इसलिए खनन भी होता है। खनन के कारण ही वहां गहरा गड्ढा हो गया। इसका किसी काे अंदाजा नहीं था कि गड्ढा इतना गहरा होगा कि वह हादसे का कारण बन जाएगा।