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Agra Hospital Fire: अस्पताल संचालक को डॉक्टर कहकर बुलाते थे लोग, पंजीकरण है किसी दूसरे के नाम पर

Thu, 06 Oct 2022 10:27 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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अस्पताल के बाहर जमा भीड़ - फोटो : अमर उजाला
आगरा के आर मधुराज हॉस्पिटल में आग लगने की घटना में डायरेक्टर राजन, उनकी बेटी सिमरन उर्फ शालू और बेटे ऋषि की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद हर कोई स्तब्ध है। हॉस्पिटल के संचालक राजन सिंह को मरीज और तीमारदार डॉक्टर ही मानते थे। आसपास रहने वाले लोग भी राजन को डॉक्टर साहब कहकर ही बुलाते थे। यहां तक की अस्पताल के अंदर लगे बैनर पर संचालक का नाम डॉ. राजन सिंह और पद डायरेक्टर लिखा हुआ है। 

पिता गोपीचंद के मुताबिक राजन सिंह बीए उत्तीर्ण थे। वह कंपाउंडर रह चुके थे। जब से अस्पताल बना उसका संचालन देख रहे थे। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में अस्पताल डॉ. इशू शर्मा (फिजीशियन) के नाम से पंजीकृत है। डॉ. इशू शर्मा की डिग्री एमबीबीएस व एमडी हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि आग लगने की सूचना पर वह अस्पताल पहुंचे तो डॉ. इशू शर्मा मौके पर मिले। उन्होंने यह बात स्वीकार किया कि वह आर मधुराज हॉस्पिटल में ही प्रेक्टिस करते थे।     
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आग लगने की घटना के बाद जांच करती टीम - फोटो : अमर उजाला
अस्पताल के बाहर लगे बोर्ड पर अस्पताल में सेवाएं देने वाले तीन डॉक्टरों के नाम लिखे थे। इसमें डॉ. ईशू शर्मा के अलावा डॉ. अनूप शर्मा (एमबीबीएस, एमएस) व डॉ. मनोज वर्मा (एमबीबीएस, एमएस) का नाम लिखा था, जबकि अंदर बैनर पर पांच डॉक्टरों का नाम था।
 
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आर मधुराज अस्पताल में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
 इसमें डॉ. ईशू शर्मा के अलावा डॉ. एस वर्मा (स्त्री रोग विशेषज्ञ), डॉ. जितेंद्र वर्मा (लेप्रोस्कोपिक सर्जन), डॉ. पीके श्रीवास्तव (बाल रोग विशेषज्ञ व जनरल सर्जन), डॉ. घनेंद्र यादव (यूरो सर्जन) का नाम लिखा था। 

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आर मधुराज अस्पताल में लगी थी आग - फोटो : अमर उजाला
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. ओपी यादव ने बताया कि आर मधुराज हॉस्पिटल में जिन डॉक्टरों के पैनल का नाम दिया गया है, उसमें से कोई आईएमए का सदस्य नहीं है। इस संबंध में जानकारी कर ली गई है। यहां तक की डॉक्टरों के नाम सुने भी नहीं हैं।   
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अस्पताल संचालक की पत्नी - फोटो : अमर उजाला

मरीजों को किया शिफ्ट

अस्पताल में चार मरीज भर्ती थे। उनके साथ छह तीमारदार भी थे। कर्मचारियों में चार लोग थे। आग लगने पर सभी बाहर निकल आए। इसके बाद सभी को शिफ्ट कर दिया गया। तीमारदार यही कह रहे थे कि अस्पताल में आग पहुंच जाती तो जान बच पाना मुश्किल हो जाता।
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